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लीज रेंट पर गरमा रहा है मामला

भोपाल. अरेरा कालोनी में ई-6 और ई-7 के रहवासियों को मकान विस्तार के लिए ऋण लेने और मकान का नामांतरण करने में परेशानी आ रही है। इस तरह के मामलों में हाउसिंग बोर्ड बढ़ी हुई लीज दर जमा करने के लिए दबाव बनाता है, जबकि रहवासियों ने इस लीज दर के खिलाफ बोर्ड को नोटिस थमा रखा है।

ई-6 एमआईजी 106 में रहने वाले एचएल गोलाइत को अपने मकान का विस्तार करने के लिए लोन लेना है। बैंक उनसे हाउसिंग बोर्ड से नो ड्यूज सर्टिफिकेट की मांग कर रहा है। श्री गोलाइत की परेशानी यह है कि वे पुरानी दर से तो लीजरेंट जमा करा चुके हैं, लेकिन बोर्ड ने आवंटन के समय से दर बढ़ाने का नोटिस थमा रखा है। वरिष्ठ नागरिक मंडल व स्थानीय रहवासी चार साल से लीजरेंट वृद्धि का विरोध कर रहे हैं। रहवासी आश्वासन चाहते हैं कि लीजरेंट में छूट पर रकम वापस दी जाएगी।

क्या है मामला: ई-6 एवं ई-7 सेक्टर की भूमि शासन द्वारा 1970-71 में हाउसिंग बोर्ड को रिहाइशी जरूरतों के लिए रियायती दरों पर दी गई थी। 1970 से 75 के बीच यह जमीन एक रुपए प्रति सौ वर्ग फीट प्रति माह की दर पर आवंटित की गई। व्यावसायिक भूमि का लीज रेंट 5 रुपए प्रति सौ वर्ग फीट तय किया गया था। सन 2003 के बाद लीज रेंट 272 गुना बढ़ाकर बोर्ड ने निवासियों को राशि जमा करने के नोटिस दिए थे।

स्थानीय रहवासियों ने वरिष्ठ नागरिक मंडल के माध्यम से इस पर आपत्ति जताई। विधानसभा में यह मामला उठने पर बोर्ड ने गत 29 मार्च को कलेक्टर दर को आधार बना कर लीजरेंट तय करने के आदेश दिए थे।

इस आदेश के अनुसार बोर्ड कलेक्टर द्वारा तय दर का छह गुना और उस पर दस प्रतिशत पर्यवेक्षण शुल्क वसूलेगा। इसी आदेश में यह बात भी शामिल थी कि व्यतीत अवधि का लीजरेंट भी इसी आधार पर लिया जाएगा। इस आधार पर बोर्ड ने पुरानी दर को आवंटन की तारीख से दस गुना बढ़ाया उस पर 14 प्रतिशत ब्याज लगाया और नए अनुबंध के लिए इस बढ़ी हुई दर को छह गुना कर दिया।

अलग- अलग मापदंड
एक तरफ बोर्ड ने अरेरा कालोनी के रहवासियों के लीजरेंट में अनुबंध की शर्तो के विपरीत पुरानी तारीख से वृद्धि की, वहीं शिवाजी नगर के 60 मकान मालिकों के मामले में अलग मापदंड अपनाया। शिवाजी नगर का नया लीजरेंट 3.25 रुपए प्रति वर्ग फुट तय किया गया है, जो पुरानी दर का छह गुना है।

छह अप्रैल को न्यायालय में जा सकता है मामला
वरिष्ठ नागरिक मंडल के सदस्य एसएस रघुवंशी और एसी जुमड़े के अनुसार उनके द्वारा दिए गए नोटिस की अवधि छह अप्रैल को समाप्त हो रही है। यदि मामला नहीं सुलझा, तो वरिष्ठ नागरिक मंडल बोर्ड के खिलाफ न्यायालय में जाएगा।

>> विसंगति तीस साल पहले हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारियों द्वारा की गई गणना में गलती के कारण निर्मित हुई है। हम मामले का परीक्षण करा रहे हैं।
जयंत मलैया, मंत्री, आवास व पर्यावरण विभाग





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