विकास मंत्र. कुछ लोग सोच-विचार करने, योजनाएं बनाने और कल्पना करने में ही काफी समय जाया कर देते हैं। यह करेंगे, वह करेंगे सरीखी कल्पना कर वे अपने ही रचे कल्पना लोक में विचरण करते रहते हैं। यद्यपि उनके इरादे गलत नहीं होते। वे वास्तव में जीवन में कुछ सीखना और करना चाहते हैं।
इसके बावजूद वे जो चाहते हैं उसे इसलिए हासिल नहीं कर पाते क्योंकि उनका रवैया सही नहीं होता। उनका लंबा समय सोच-विचार और कल्पना करने में ही बीत जाता है। यहां तक कि वे जिस वक्त वास्तव में काम कर रहे होते हैं, उस वक्त भी उनका दिमाग भविष्य की योजनाओं से जुड़ी उधेड़बुन में ही लगा रहता है। नतीजतन वे हाथ में आए उस काम को भी अच्छे से नहीं कर पाते, जिससे उनकी निराशा और कुंठा में और वृद्धि होती है।
सही है किसी काम को अच्छे से पूरा करने के लिए एक हद तक सोच-विचार और योजनाएं बनाना जरूरी होता है, लेकिन इस मामले में अति सारा खेल बिगाड़ देती है। बेहतर रहेगा कि इस सतत मानसिक प्रक्रिया को विराम देकर और उपलब्ध काम को अच्छे से कर जीवन से अधिकाधिक हासिल किया जाए। ऐसा तभी होगा जब आप दिन में सपने देखना छोड़ कर कुछ न कुछ रचनात्मक करते रहें।
इसकी शुरुआत छोटे-छोटे काम से होती है। एक काम पूरा हो जाए तो दूसरा हाथ में ले लें। आपकी कुंठा का मूल यही है कि आप बहुत कुछ तुरंत करना, सीखना और हासिल करना चाहते हैं। वह भी बगैर समय दिए।
व्यावहारिक तौर पर ऐसा कदापि संभव नहीं है, यह हम सभी जानते हैं। साथ ही यह भी जानते हैं कि हमारी इच्छाएं और योजनाएं समय के साथ-साथ बदलती रहती हैं। अत: सफलता और संतुष्टि केवल वर्तमान काम को अच्छे से पूरा करने में ही निहित है।