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एकतानगर से नहीं बहेगा गंदा पानी

इंदौर. पूर्वी रिंगरोड पर बसे एकतानगर (मूसाखेड़ी) में इसी साल लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उसके बाद घरेलू उपयोग के बाद बहने वाले पानी का उपयोग अन्य कार्यो के लिए किया जा सकेगा। यह काम गंदी बस्तियों में साफ-सफाई के क्षेत्र में काम करने वाली लंदन की संस्था वाटर एड, भारतीय ग्रामीण महिला संघ इंदौर के माध्यम से करेगी।

वाटर एड से जुड़े प्रमोद डबरासे, पूर्णंदू शुक्ल और उषा अग्रवाल ने एकतानगर में हुए सुधार कार्य दिखाते हुए संवाददाताओं को बताया संघ ने शहर का सर्वे कर 604 गंदी बस्तियां चिह्न्ति की थीं जबकि नगर निगम 229 बताता है। हम एकतानगर के पायलट प्रोजेक्ट के साथ 15 बस्तियों में काम कर रहे हैं।

दो साल में आया सुधार
श्री शुक्ल ने बताया दो साल पहले एकतानगर में काम शुरू किया था तब बड़ी अव्यवस्था थी। अब बस्तीवासी और खासतौर पर महिलाएं सफाई को लेकर बहुत जागरूक हैं। श्रीमती अग्रवाल ने बताया हमने महिलाओं की समिति बनाकर बस्ती सुधार की जिम्मेदारी सौंप दी है।

अब तक हुए काम
बस्ती में काम शुरू किए थे तब 87 में से 30 झुग्गियों में टॉयलेट नहीं थे। अब सभी में पक्के टॉयलेट हैं।
वाटर एड ने प्रत्येक टॉयलेट के लिए 4,300 रुपए का ऋण आसान किस्तों में दिया। इसमें एक हजार रुपए की सब्सिडी शामिल है।
स्कूल हाईजीन पर भी जोर दिया। बच्चों को सफाई की जानकारी दी। अब वे नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को सफाई कर बीमारियों से बचने की सीख देते हैं।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग, बायोगैस और सोखता गड्ढा जैसे प्रयोग शुरू किए।
कचरा निपटान के लिए खाद बनाने और घर-घर से कचरा जुटाने का इंतजाम। सूखे-गीले कचरे के लिए अलग-अलग कचरा पेटियों का वितरण।
पहले महिलाएं घर के आसपास कपड़े धोती थीं। अब सभी के लिए एक प्लेटफॉर्म बनाया गया।

मीडिया से चर्चा आज
वाटर एड ने शनिवार सुबह 11 बजे होटल श्रीमाया सेलिब्रिटी पर मीडिया से विचार-विमर्श कार्यक्रम रखा है। उसमें समाजसेवी गोविंदन कुट्टी मेनन और पत्रकार रवींद्र शुक्ला भी भाग लेंगे।





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