धार.
प्रतिबंधित सिमी के 13 मोस्ट वांटेड को पकड़े जाने के 32 घंटे बाद कड़ी सुरक्षा में शुक्रवार दोपहर 1.10 बजे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एस.एस. ठाकुर के सामने पेश किया गया। बंद कमरे में करीब 20 मिनट तक प्रकरण की सुनवाई चली।
इसके बाद सभी को 11 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर सौंपा दिया गया। इस दौरान अभियोजन व पुलिस अधिकारियों को ही उपस्थित रहने की अनुमति दी गई। इससे पहले जहां भारतीय जनता युवा मोर्चा के पदाधिकारियों ने आरोपियों के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया वहीं धार के अभिभाषकों ने आरोपियों की पैरवी नहीं करने का फैसला किया।
मुख्य सरगना सफदर नागौरी सहित आमिल परवेज, कमरूद्दीन, सिवली करीम, साबिर करीम, अंसार रज्जाक, यासिन हमीद, हाफिज हुसैन, अहमद बेग, शमीबकर, मुनरोज, खालिद अहमद, कामरान अंसारी को पीथमपुर थाने से धार कोर्ट लाया गया। इससे पहले अदालत परिसर से आम लोगों को हटा दिया गया। खोजी कुत्तों ने परिसर के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली और कोने-कोने में पुलिसकर्मी तैनात रहे। दोपहर (1.10 बजे) मुंह पर नकाब और रस्सी से पीछे हाथ बंधे आरोपियों को बख्तरबंद वाहन से उतारकर कोर्ट कक्ष में लाया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एस.एस. ठाकुर की कोर्ट के गलियारे में एसटीएफ जवान मोर्चा संभाले थे। जैसे ही यह अदालत कक्ष में पहुंचे, दरवाजा बंद हो गया।
अनुसंधान अधिकारी पीथमपुर थाना प्रभारी बी.पी.एस. परिहार ने डायरी पेश की और अभियोजन अधिकारी अशोक कुमार चौरे ने चार प्रमुख बिंदु गिनाते हुए 14 दिन के रिमांड की मांग की। आरोपियों की पैरवी के लिए एक भी अभिभाषक सामने नहीं आया। 20 मिनट (दोपहर 1.30 बजे) के भीतर ही श्री ठाकुर ने 14 दिन का रिमांड मंजूर कर लिया।
सफदर के पिता दु:खी
उज्जैन.
यह तो होना ही था, यह कहना है सफदर नागौरी के पिता जहीर उल हसन का। सफदर अपने नापाक इरादों के लिए चाहे जो हौंसला दिखाए लेकिन उसका परिवार उसे लेकर हताश और निराश है।
पुलिस की वर्दी पहनकर देशभक्ति में जीवन खपा देने वाले सफदर के पिता से शुक्रवार को जब भास्कर ने चर्चा की तो उन्होंने कहा- ‘एक न एक दिन यह तो होना ही था। हमने जब महसूस किया कि वह गलत रास्ते पर है तो अखबार में (2003 में) जाहिर सूचना छपवाई कि सफदर नागौरी से हमारा कोई संबंध नहीं है।’
हज जाते समय हुई थी मुलाकात : सफदर से उनकी मुलाकात जनवरी 2006 में हज जाते समय हुई थी। पिता के अनुसार मुंबई में वह मिलने आया था। उस समय कई रिश्तेदार भी मौजूद थे। सभी ने उसे समझाया और आत्म समर्पण करने की सलाह दी थी। हम भी उसे यही नेक रास्ता दिखाकर हज पर चले गए थे। तब से अब तक दोबारा मुलाकात नहीं हुई।