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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी को केंद्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने की खबर लगते ही शहरवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। उड़ते गुलाल और ढोल-ताशों के बीच जमकर पटाखे फूटते रहे। थोड़ी देर के लिए लग रहा था कि मानो होली और दीवाली एक साथ आ गई हो।
25 साल बाद ही सही, लेकिन केंद्र सरकार को गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी पर केंद्रीय मान्यता की मुहर लगानी ही पड़ी। 16 जून 1983 को यूनिवर्सिटी के शिलान्यास अवसर पर अविभाजित मप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरजुन सिंह ने संकेत दे ही दिया था कि गुरुघासीदास यूनिवर्सिटी की स्थापना इसके केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनने का पहला चरण है।
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री के रूप में गुरुवार उन्होंने इसे केंद्रीय मान्यता दिलाकर अपना वादा पूरा कर दिया। केंद्रीय मान्यता मिलने की सूचना पाते ही यूनिवर्सिटी में जश्न का माहौल बन गया। कर्मचारियों, अधिकारियों व शिक्षकों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई दी। इस दौरान विवि के सैकड़ों कर्मचारियों ने प्रेस क्लब पहुंचकर दिल्ली में धरने का प्रतिनिधित्व करने वाले पत्रकारों को बधाई दी।
ढोल-ताशे व रंग-गुलाल के बीच आतिशबाजी होती रही। कर्मचारियों ने पत्रकारों के साथ मिलकर प्रेस क्लब से रैली निकाली, जो मुख्य मार्ग से होते हुए नेहरू चौक पर समाप्त हुई। उल्लेखनीय है कि यूनिवर्सिटी को केंद्रीय मान्यता दिलाने के लिए छात्रों, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों व जनता ने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से एकजुट होकर मेहनत की थी। इस दौरान धरना, प्रदर्शन, पोस्टकार्ड व धोती में हस्ताक्षर अभियान, हवन किया गया था। रेलवे जोन के बाद शहरवासियों का यह दूसरा सफल प्रयास रहा है।
बांधी ने दी बधाई: उच्चशिक्षा मंत्री डा.कृष्णमूर्ति बांधी ने गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी को केंद्रीय मान्यता मिलने पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है। श्री बांधी इन दिनों गोवा प्रवास पर हैं। उन्होंने केंद्रीय यूनिवर्सिटी के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से प्रयास करने वालों को इसका श्रेय दिया है।
श्री बांधी ने इसके लिए सर्वाधिक श्रेय मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह को दिया है, जिन्होंने यूनिवर्सिटी को केंद्रीय मान्यता दिलाने संबंधी प्रस्ताव केंद्र शासन को भेजा। श्री बांधी ने कहा कि यूनिवर्सिटी को केंद्रीय मान्यता मिलने के बाद यहां शिक्षा का स्तर अखिल भारतीय स्तर का हो जाएगा। उन्होंने इस सफलता के लिए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री अजरुन सिंह का भी आभार माना है।
क्या हुआ है अभी?
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री अरजुन सिंह ने गुरुघासीदास यूनिवर्सिटी को केंद्रीय मान्यता देने के संबंध में प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह से अनुमोदन कराकर संसद में इसकी घोषणा कर दी है। कैबिनेट में प्रस्ताव पास करने के बाद इसकी विधिवत अधिसूचना जारी की जाएगी। अधिसूचना जारी होने में कुछ महीने लग सकते हैं, लेकिन चुनावी वर्ष होने के कारण इसमें विलंब होने की संभावना कम है।
केंद्रीय मान्यता मिलने के लाभ
केंद्रीय मान्यता मिलने के बाद गुरु घासीदाय यूनिवर्सिटी की बागडोर राज्य से केंद्र सरकार के हाथों में चली जाएगी। यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति राज्यपाल के स्थान पर राष्ट्रपति हो जाएंगे। बजट की व्यवस्था के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन को हाथ-पैर मारने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि केंद्र से मांगते ही भरपूर बजट मिल सकेगा।
भरपूर बजट होने के बाद यहां रिसर्च इंस्टीटच्यूट, रोजगारोन्मुखी पाठच्यक्रम खुल सकेंगे। नए भवन बनेंगे एवं भारत भर के विषय विशेषज्ञ यहां अपनी सेवाएं देंगे। शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन में आमूलचूल बढ़ोतरी होगी। यूनिवर्सिटी के अंतर्गत शामिल सात जिलों में सभी पिछड़ व आदिवासी बाहुल्य हैं। केंद्रीय मान्यता मिलने के बाद पिछड़े लोगों को उच्चशिक्षा ग्रहण कर रोजगार पाने का अवसर मिल सकेगा।
करोड़ों का बजट
केंरदीय मान्यता मिलने के बाद गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी को इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी, लेबोरेटरी एवं उपकरणों के लिए एकमुश्त 50 करोड़ रुपए मिलेंगे। यह राशि विवि के वर्तमान बजट से पांच गुना अधिक है। इसी तरह विवि के कम से कम 10 अध्ययन शालाओं को खर्च के लिए पांच-पांच लाख रुपए मिलेंगे।
अपग्रेड होने के बाद विवि में राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं जुटाई जाएंगी। पूरा कैंपस कंप्यूटराइज्ड बनाया जाएगा। प्रोफेसरों को रिसर्च के लिए अधिक अनुदान मिलेंगे। वर्तमान में विवि को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार व वर्कशाप कराने के लिए प्रायोजक तलाशने पड़ते हैं, लेकिन अब ऐसी कोई बात नहीं रहेगी।
>> यूनिवर्सिटी को केंद्रीय दर्जा मिलना बड़े गर्व की बात है। आने वाले वर्षों में यूनिवर्सिटी का भविष्य उज्वल है। सौगात तो हमें मिल गई, लेकिन इसे संवारने के लिए सबको अब और अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। इस सफलता में सब बराबर के हिस्सेदार हैं।
जेएल गुप्ता, कुलपति