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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
जेल में वेश्यावृत्ति होना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रदेश की सभी जेलों की स्थिति खराब है। इसे शीघ्र ही सुधारने की जरूरत है। सेंट्रल जेल के दौरे पर आए डीजीपी संत कुमार पासवान ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए ये बात कही। कैदियों के बीच हिंसक संघर्ष व हंगामे से बिगड़ी स्थिति के बाद आज उन्होंने जेल का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि बुधवार को हुई घटना ज्यादा गंभीर थी।
आज रायपुर भेजे गए कैदी गोलू पांडेय की मौत की अफवाह सुनकर कैदी भड़क गए थे और मारपीट पर उतारू हो गए थे। बुधवार को एक कैदी के कहने पर जेल में दो महिलाएं अवैध रूप से घुसी थीं। इसमें मुख्य प्रहरी समेत दो प्रहरियों को सस्पेंड कर दिया गया है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। महिलाओं के खिलाफ भी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
पूरे मामले की जांच डीआईजी जेल पीडी वर्मा कर रहे थे। रिपोर्ट में जिसकी गलती सामने आएगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बैरकों का भी निरीक्षण किया और कैदियों से बातचीत की। कैदियों ने उन्हें बताया कि दोनों गुट के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी। अपनी पैठ जमाने के लिए वे कैदियों से मारपीट भी करते थे। घटना पर अफसोस जाहिर करते हुए कैदियों ने उनसे माफी भी मांगी।
बरपा हंगामा, बरसीं लाठियां
कुछ ही समय बाद पुलिस फोर्स वहां पहुंच गई। यहां हंगामा मचा रहे कैदियों की जमकर धुनाई भी की गई। मारपीट के बाद किसी ने गोली चलने की अफवाह उड़ा दी, जिससे अफरातफरी मच गई।
हंगामा की सूचना मिलने के बाद बाद एडिशनल कलेक्टर पीएस एल्मा, एसडीएम संजय अग्रवाल, जेल अधीक्षक राजेंद्र गायकवाड़, एएसपी सिटी बीएन मीणा व पुलिस बल की मौजूदगी में 14 कैदियों को विशेष बल के साथ दूसरी जेलों के लिए भेजा गया। इनमें तमेश सिंह, टुकेश सिंह, रंजन गर्ग, शशिकांत को रायपुर, बबलू प्रधान, बाबा उर्फ राजेश, बबुआ उर्फ गंगाप्रसाद को दुर्ग और पप्पू सिंह, बिल्लू उर्फ सुनील व मोहन नेपाली को जगदलपुर जेल भेजा गया है।
इसी तरह विकास उर्फ पिंटू, बसंत सिंह, संजय पांडेय व शरद उर्फ ढनढन को रायपुर जेल शिफ्ट किया गया है। हत्या के मामले में बंद रंजन गर्ग व उसके समर्थकों ने सुबह से ही शिफ्टिंग को भेदभावपूर्ण बताते हुए जेल प्रशासन पर आरोप लगाना शुरू कर दिया।
पुलिस बल ने जेल में हंगामा मचा रहे कैदियों की पिटाई भी की। गोली चलने के अलावा जेल से हथियार बरामद होने की भी चर्चा थी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद श्री एल्मा ने गोली चलने की बात का खंडन करते हुए कहा कि खाने के दौरान विवाद होने पर कैदियों में झूमाझटकी हुई थी।
उच्च अधिकारियों के आदेश पर जेल के भीतर अव्यवस्था की स्थिति निर्मित करने वाले 14 कैदियों का ट्रांसफर करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने सीमा समुद्रे का भी मामले में ताल्लुक नहीं होने की बात कही है।
एक ने लगाया आरोप, दूसरे ने नकारा: जेल से बाहर लाए जाने पर एक बार फिर रंजन गर्ग ने हंगामा खड़ा कर दिया। उसने जेल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए शिफ्टिंग को भेदभावपूर्ण बताया। जेल में गोली चलने, भूख हड़ताल पर बैठने के साथ ही वेश्यावृत्ति की बात भी उसने स्वीकार की है।
इसके बाद जब तुकेश सिंह को बाहर लाया गया तो उसने आरोपों को गलत बताते हुए अस्वीकार कर दिया। उसका कहना था कि रंजन व उसके साथी जेल में वसूली करते थे, जिसका विरोध करने पर वह दुश्मनी करने लगा था।
दोनों गुट का ट्रांसफर एक ही जगह: रंजन उसके भाई शशि और टुकेश व तमेश को रायपुर जेल ही ट्रांसफर किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नए जगह में विवाद की स्थिति नहीं बनेगी। सूत्रों के मुताबिक बलवे के दौरान दोनों गुट मरने-मारने पर उतारू थे। रायपुर जेल में उनके साथी नहीं होंगे, लेकिन उनके बीच दुश्मनी कायम रहेगी। ऐसे में वहां भी गुटबाजी होने से जेल प्रशासन को परेशानी हो सकती है।
नक्सली साजिश तो नहीं: सेंट्रल जेल में हुई घटना को हालांकि अधिकारी नक्सली साजिश मानने से इनकार कर रहे हैं, लेकिन जेल ब्रेक के मास्टरमाइंड कहे जाने वाले नक्सली नेता व अन्य कैदियों की उपस्थिति से इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
खुफिया विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक रंजन व सान्याल के अच्छे संबंध थे। दोनों साथ में बैठकर बातचीत भी करते रहते थे। रायपुर सेंट्रल जेल में कैदियों को भड़काने व भूख हड़ताल पर बैठने के कारण ही सान्याल को यहां शिफ्ट किया गया था। इसके बाद यहां भी भूख हड़ताल व दो गुटों में संघर्ष से बनी स्थिति असफल जेल ब्रेक के समान है। 20 नक्सलियों की मौजूदगी भी चिंता का विषय है। जेल प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
आखिर दोषी कौन: सेंट्रल जेल में तीन दिन चले हंगामे के बाद प्रशासन ने 14 कैदियों को अन्य जेलों में शिफ्ट कर दिया। इसकी गाज केवल तीन प्रहरियों पर गिरी है। अधिकारियों को किसी तरह की कार्रवाई से दूर रखा गया है, हालांकि अभी जांच रिपोर्ट आनी शेष है।
जेल में गुटबाजी व संघर्ष का मुख्य दोषी जेल प्रशासन है। यदि समय रहते इस पर अंकुश लगा दिया जाता तो स्थिति गंभीर नहीं होती। दोषियों के साथ जेल अधिकारियों के अच्छे संबंध की बातें भी सुनने को मिली हैं। ऐसे में प्रशासन को कठोर निर्णय लेने चाहिए और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
डिप्टी जेलर पर गिर सकती है गाज
सेंट्रल जेल में वेश्यावृत्ति के मामले में डिप्टी जेलर जेएल पुरैना पर गाज गिर सकती है। एकाध दिनों में उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। हमारे रायपुर कार्यालय के मुताबिक श्री पुरैना शुरू से ही विवादित रहे हैं। गरियाबंद जेल में उनके खिलाफ ब्राrाण कैदी को प्रताड़ित करने का आरोप लगा था। इसके चलते कैदी जेल से भाग गया। बाद में पकड़े जाने पर उसने श्री पुरैना के खिलाफ बयान दिया था।
इसके बाद रायपुर जेल में भी वे विवादों में रहे। रायपुर के बाद जांजगीर जेल में रहते हुए उन्होंने कैदी से बुरी तरह मारपीट की थी। अदालत के निर्देश पर कैदी का मुलाहिजा कराया गया था। इसमें कैदी का हाथ फ्रैक्चर हो गया था। इस मामले में उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए गए थे।`2