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पुलिस पर ग्रामीणों की हत्या का आरोप

दंतेवाड़ा. बीजापुर जिले के माटवाड़ा कैंप में रहने वाले तीन ग्रामीणों की लाशें संदेहास्पद परिस्थिति में मिली हैं। पुलिस का दावा है कि इन तीनों की हत्या नक्सलियों ने की है। दूसरी तरफ मृतकों के परिजनों का आरोप है कि एसपीओ और पुलिस ने तीनों की हत्या कर लाशें नदी की रेत में गाड़ दीं।

ये लाशें मड्डा मड़कामी, देवा मड़कामी और हिड़मा मंडावी की बताई गई हैं। देवा मड़कामी के भाई बामन मड़कामी और पत्नी हुंगी ने बताया कि गत 18 मार्च की शाम 4 बजे जांगला थाने में पदस्थ पटेल और एसपीओ कोसा और फोटू शिविर में आए थे। वहां से वे देवा समेत चार ग्रामीणों को जबर्दस्ती अपने साथ ले गए। प्रतिरोध करने पर जवानों द्वारा परिजनों की पिटाई करने का आरोप है। परिजनों का कहना है कि पुलिस जवानों ने देवा की जंगल में बेदम पिटाई के बाद हत्या कर दी।

शिविर से जबर्दस्ती ले जाए गए दो अन्य ग्रामीणों मड्डा और हिडमा की लाशें भी देवा के शव के साथ इसी गड्ढे में मिलीं। अगले दिन भी जब ये चारों माटवाड़ा शिविर में नहीं लौटे तो परिवार के लोग उनकी तलाश में निकले। इलाके में कई घंटे चली तलाशी के बाद नदी में एक जगह रेत खोदकर गाड़ दी गईं तीनों की लाशें मिलीं। इसी बीच सोमू पिता बुधु कड़ियम के बचने का पता चला, जिसे देवा के साथ पुलिस के जवान कथित रूप से पकड़ कर ले गए थे। सोमू किसी तरह पुलिस के चंगुल से बचकर भाग निकला। जंगल में छिपते हुए सोमू घटनास्थल से 40 किमी दूर कंवलनार आश्रम पहुंचा। सोमू के शरीर पर अभी तक पिटाई केजख्म हैं।

सोमू ने शनिवार को वनवासी चेतना आश्रम कंवलवार के संचालक हिमांशु कुमार के सामने संवाददाताओं को पूरी घटना की जानकारी दी। उसका आरोप है कि जंगल में पुलिस के जवानों और एसपीओ ने डंडों से चारों की जमकर पिटाई की। बाद में तीन लोगों की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। सोमू और मृतकों के परिजनों ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।





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