भोपाल. दसवीं और बारहवीं पास युवाओं को यह खबर बड़े झटके से कम नहीं है। उन्हें आईटीआई, डिप्लोमा या शार्ट हैंड और तकनीकी ट्रेनिंग के बाद नौकरी मिलने के अवसर खत्म होने वाले हैं। अब केंद्र सरकार सिर्फ ग्रेजुएट समेत एक वर्ष की कंप्यूटर ट्रेनिंग वालों को ही नौकरी देगी।
इस बात का खुलासा छठवें वेतन आयोग की केंद्र को हाल में सौंपी गई रिपोर्ट से हुआ है। इससे देश भर में 10वीं और 12वीं के बाद 92 प्रतिशत नौकरी चाहने वाले युवाओं को नौकरी के अवसर से हाथ धोना पड़ सकता है। यह नियम लागू होता है तो सिर्फ 8 फीसदी अभ्यर्थी नौकरी पाने के लिए पात्र होंगे। इस बात से कर्मचारी हलकों के साथ देश भर के 18 से 35 वर्ष के युवाओं में हड़कंप मच गया है।
केंद्र सेवा प्रदाय करने वाला सबसे बढ़ा नियोक्ता : अब तक 10वीं और 12वीं पास युवाओं को सिद्धांतत: रोजगार देने वाला केंद्र सबसे बढ़ा नियोक्ता रहा है। लेकिन छठवें वेतन आयोग की अनुशंसा के मुताबिक केंद्र भी इस वर्ग के लोगों को नौकरी देने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ सकती है। आयोग की अनुशंसा लागू होने पर केंद्र का यह कदम बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी) से एक कदम आगे होगा।
क्या है मामला: आयोग में मिनिस्ट्रियल, स्टेनोग्राफर और विभिन्न कार्यालयों के मैदानी अधिकारियों की भर्ती पर तुरंत रोक लगाने की अनुशंसा की गई है। जबकि इन पदों पर भर्ती के पुराने नियमों के अनुसार अभ्यार्थी की योग्यता 10वीं और 12वीं समेत शार्ट हैंड रखी गई थी, जो कर्मचारी आयोग द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं के माध्यम से होती थी। अब इन पदों पर भर्ती के लिए अभ्यर्थी को ग्रेजुएट के साथ एक साल का कंप्यूटर डिप्लोमा होना आवश्यक है। इसके बाद उसकी नियुक्ति एक्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के पद पर होगी। इस पद का उन्हें 6500-10500रुपए वेतनमान देने की अनुशंसा की गई है। जो नए वेतनमान में पे-बैंड-2 में 8700-34800 रुपए होगा।
कार्यरत लोगों को पदोन्नत किया जाए: केंद्र सरकार की सेवाओं में जो सेवक 10वीं और 12वीं पास होकर सेवा में भर्ती होकर एलडीसी, यूडीसी, हेड क्लर्क, अस्सिटेंट स्टेनो ग्रेड, कार्यालय अधीक्षक को अवसर प्रदान कर उन्हें विभागीय परीक्षा के जरिए एक्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के पद पर पदोन्नत किया जाए। इनमें से जो अमला पदोन्नत नहीं हो पाता है, उसे सेवा से पृथक भी किए जाने का खतरा है।
आयोग की अनुशंसा में जो सिफारिश की गई है, उससे युवाओं के रोजगार के अवसर पर खतरा मंडरा सकता है। साथ ही केंद्र की सेवाओं में ग्रुप सी का जो अमला कार्यरत है, विभागीय परीक्षा पास न होने पर उसकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है। टीकेआर पिल्लई, प्रवक्ता, केंद्रीय कर्मचारी परिसंघ
अब ग्रैजुएट्स को ही मिलेगी बीपीओ की नौकरी
रोशन शर्मा पिछले चार साल से एक बीपीओ में काम कर रहे हैं। पिछले माह शादी के बाद उन्होंने ऊंची तनख्वाह वाली नौकरी ढूंढ़नी शुरू कर दी थी, लेकिन तकदीर को यह मंजूर नहीं था। अब रोशन के लिए बीपीओ सेक्टर में दूसरी नौकरी मिलना मुश्किल है, क्योंकि इस क्षेत्र में काम कर रहे प्रारंभिक स्तर के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10+2 से बढ़कर अब ग्रैजुएशन हो गई है। रोशन कहते हैं,‘यह ठीक नहीं। मुझे ग्रैजुएशन करने में एक साल और लगेगा। कंपनी को इस बदलाव के लिए पहले से आगाह करना चाहिए था।’
आसान काम नहीं: रोशन ऐसे अकेले व्यक्ति नहीं हैं। देशभर के बीपीओ में कार्यरत उनके जैसे कई लोग इस समस्या का सामना कर रहे हैं। अब वे अपना ग्रैजुएशन पत्राचार कोर्स के मार्फत करने की कोशिश कर रहे हैं। फिर यह काम समय पर पूरा हो जाए, ऐसा भी जरूरी नहीं।
पढ़ाई के लिए चाहिए पर्याप्त वक्त: पिछले छह साल से बीपीओ सेक्टर में कार्यरत नरेश सिंह कहते हैं, ‘मुझे चार साल हो चुके हैं और मैं अब भी अपना ग्रैजुएशन पूरा नहीं कर सका हूं। इसका मुख्य कारण यह है कि मुझे पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है। यदि मुझे पता होता कि जिंदगी के ऐसे मुकाम पर मुझे पढ़ना पड़ेगा तो मैं कभी इस काम में नहीं फंसता।’