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सिमी को धन मुहैया कराने वाले गिरफ्तार

इंदौर. सिमी के 13 कुख्यात सरगनाओं से जारी पूछताछ में इंदौर में उनकी मदद करने और उन्हें धन उपलब्ध कराने वालों के नाम सामने आने लगे हैं। इनमें से दो लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं, जबकि कई लोगों की निगरानी की जा रही है। निगरानीशुदा लोगों में दस प्रभावी लोग भी शामिल हैं।

हरियाणा, केरल, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र की एटीएस के साथ आईबी के अधिकारी सफदर नागौरी और उसके साथियों से लगातार पूछताछ कर रहे हैं। शनिवार रातभर चली पूछताछ में उन्होंने इंदौर में सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ धन मुहैया कराने वालों के नाम भी उगले हैं। इसी आधार पर अब्दुल रज्जाक तथा मोहम्मद रईस को गिरफ्तार किया गया है। इसकी पुष्टि एसपी अंशुमान यादव ने की है।

खजराना के प्रॉपर्टी व्यवसायी इलियास और इकबाल को भी हिरासत में लिया गया है। आरोपियों के घर से कंप्यूटर व अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई है। प्लास्टिक फैक्ट्री का मालिक अब्दुल रज्जाक 2001 और 2006 में भी गिरफ्तार हुआ था। मोहम्मद रईस कम्युनिकेशन कंपनी में काम कर सिमी के लिए रुपए जमा करता था। माना जा रहा है ये दोनों समझौता और मुंबई ब्लास्ट की मुख्य कड़ियां हैं।

खुफिया विभाग के पास इंदौर के जिन 95 लोगों की लिस्ट थी, उन्हीं में से ज्यादातर लोग सिमी के मददगार निकले हैं। उनके बारे में ‘भास्कर’ ने दो दिन पहले ही चेताया था। असलम उर्फ राजा और अब्दुल गनी को भी पकड़े जाने की खबर है।

अब जुटे साक्ष्य मिटाने में

पुलिस को उन दस प्रमुख लोगों के नाम पता चले हैं, जो 2001 के बाद से सिमी को लगातार धन उपलब्ध कराते रहे हैं। रुपयों का लेन-देन इंटरनेट बैंकिंग के मार्फत होता था। पुलिस की परेशानी यह है कि ये सभी नामचीन लोग हैं, जिन पर ठोस सबूत के बगैर हाथ डालने पर विवाद खड़ा हो सकता है। खबर है कि सफदर और उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद से इन मददगारों ने लेन-देन के साक्ष्य मिटाने शुरू कर दिए थे।

तालिबान से संबंध थे नागौरी के!

सफदर नागौरी के तालिबान प्रमुख मुल्ला उमर से भी संबंध रहे हैं। उसने तालिबान के लिए भी काम किया है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है, लेकिन कर्नाटक पुलिस की जासूसी विंग और सफदर से पूछताछ में लगी टीम के अधिकारियों ने ऐसी आशंका जताई है।





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