मुंबई/इंदौर. रियल एस्टेट और बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स में सीमेंट की बढ़ती मांग और कोयले की लागत बढ़ने से १ अप्रैल से सीमेंट कंपनियां दो-तीन रुपए प्रति बोरी बढ़ा सकती है। सीमेंट कंपनियों के परिचालन में कोयले की हिस्सेदारी 15 फीसदी है। पिछले कुछ माह में कोयले की लागत 10 से 15 फीसदी बढ़ गई है।
अन्य राज्यों में प्रति बोरी 3 से 5 रुपए तक का इजाफा हो सकता है। कंपनियों का तर्क है कि पिछले कुछ माह में कोयले की लागत 10-15 फीसदी बढ़ गई है। सीमेंट कंपनियों की परिचालन लागत में कोयले की हिस्सेदारी 12 फीसदी है।
सरकार ने सीमेंट, स्टील, मैंगनीज, फेरो क्रोम और गैर बासमती चावल पर डीईपीबी योजना के तहत मिलने वाली रियायतें खत्म कर दी हैं। इसका मतलब है कि इन उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर मिलने वाली सामग्री पर आयात शुल्क के भुगतान का दावा नहीं कर पाएंगी।
सीमेंट कंपनियों के लिए कोयला ही ऐसा कच्च माल है, जिसका वे आयात करती हैं। इस पर उन्हें 5 फीसदी ड्यूटी ड्राबैक मिलता है। सीमेंट निर्यात की मात्रा कम है, इसलिए ड्राबैक की रकम किसी निर्माता के लिए वहन करना मुश्किल नहीं होगा। घरेलू बाजार में मांग इतनी ज्यादा है कि कंपनियों को कीमतें घटाने की जरूरत नहीं है।
सीमेंट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के प्रसिडेंट व श्री सीमेंट के एमडी एचएम बांगुर ने कहा कि सीमेंट उद्योग पर डीईपीबी वापसी का ज्यादा असर नहीं होगा। पिछले साल के मुकाबले सीमेंट की मांग 9-10 फीसदी बढ़ गई है। एडेलवाइज के विश्लेषक रेवती माइनेनी, नवीन साहादेव और अर्चना खेमका ने रिपोर्ट में कहा है कि डीईपीबी वापसी से कंपनियों की आमदनी पर 0.2-1 फीसदी असर होगा।
अंबुजा सीमेंट पर 3 करोड़ रुपए और अल्ट्रा टेक पर 10 करोड़ रुपए का असर होगा। ये एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा आमदनी वाली कंपनियां हैं। जेके सीमेंट्स के प्रसिडेंट एके सरावगी का कहना है कि डीईपीबी वापसी का शायद ही कोई असर होगा, क्योंकि उनकी कंपनी तो सीमेंट निर्यात भी नहीं कर रही। सीमेंट की मांग ज्यादा है, इसलिए अगले महीने कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं। जेके सीमेंट अभी दिल्ली में 230 रुपए प्रति बोरी (50 किग्रा) बेच रही है।
गुजरात में कीमतें 5-7 रुपए प्रति बोरी बढ़ सकती हैं, क्योंकि वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) में काफी इजाफा हो चुका है। वैट की दरें 1 अप्रैल 2008 से 12.5 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी होने वाली हैं। तमिलनाडु में सरकार के हस्तक्षेप से सीमेंट की कीमतें नरम हुई हैं।
मकान का बजट और बढ़ा
स्टील, रेत, गिट्टी और ईंट की कीमतों में पहले से उछाल आ चुका है। सीमेंट कंपनियों का फैसला मकान का सपना देखने वालों का बजट बढ़ा देगा। तीन वर्षो में ईंट के ७५ फीसदी, बालू रेती के ८४ फीसदी और लोहे के दामों में दोगुना से ज्यादा इजाफा हुआ।
सालभर में दो लाख महंगा हुआ मकान : बिल्डरों के अनुसार दो हजार वर्गफीट का तल मंजिल मकान २क्क्७ में औसत १२ लाख रुपए खर्च होते थे। मूल्य वृद्धि के कारण यह लागत बढ़कर १४ लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। ठेकेदार आनंद पंडित ने बताया वर्तमान में लागत प्रति वर्गफीट ६क्क् रुपए है जो सीमेंट के दाम बढ़ने पर ६१क् रुपए तक पहुंच जाएगी। उक्त निर्माण में करीब 16क्क् बोरी सीमेंट लगती है। एक बोरी की लागत २१क् से २१३ रु. है। प्रति बोरी दो-तीन रु. बढ़ती है तो लागत 48क्क् रु. तक बढ़ जाएगी।