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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. प्राइमरी स्कूल के नन्हें-मुन्नों को गुदगुदाने के लिए टीचर भी कठपुतली का खेल दिखाने वाले बनेंगे। पहली से पांचवीं के कोर्स को अब कठपुतली के पात्रों में गढ़ दिया गया है। तानाबाना ऐसा है कि बच्चे क्लासरूम में टेंशन फ्री रहें।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण केंद्र (डाइट) ने 500 शिक्षकों को कठपुतली से अध्यापन की ट्रेनिंग दी। पांच दिन तक शिक्षकों की क्लास ली गई। गणित, विज्ञान और अंग्रेजी समेत अन्य सभी विषयों के एक-एक, दो-दो पाठ को कठपुतली के पात्रों के जरिए हल करना सिखाया गया। शिक्षकों को बताया गया कि चिंदी और कबाड़ से कठपुतली और स्टेज कैसे बनाया जाए। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि यह फामरूला आने वाले सत्र से लागू करने की कोशिश करें। ट्रेनिंग कार्यक्रम इंचार्ज मंजरी जैन ने बताया कि कठपुतली बनाने और खेल सिखाने के लिए पूर्णिमा गुप्ता को उदयपुर भेजा गया था। उन्होंने सीसीआरटी से एक माह की ट्रेनिंग ली। इसके बाद उन्होंने प्राइमरी के पाठ्यक्रम के हिसाब से कठपुतली के पात्र रचे। डाइट के विशेषज्ञों की मदद से यहां के टीचरों को ट्रेनिंग दी। डाइट की प्राचार्य डा. आर. बाम्बरा ने बताया कि पहले चरण में 500 स्कूल के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है। शिक्षकों को रिसर्च के लिए फंड दिया जाएगा। एक निर्धारित समय सीमा के बाद शिक्षक इस फामरूले की सीडी बनाकर हमें दिखाएंगे। उसका परीक्षण करने के बाद इसकी उपयोगिता का आंकलन होगा। उसके बाद इस फामरूले को राज्यभर की स्कूलों में अमल में लाने की मुहिम चलायी जाएगी।
क्या फायदा होगा?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कठपुतली को सहायक शिक्षण सामग्री के रुप में उपयोग करके बच्चों में पढ़ाई के तनाव को कम किया जा सकता है। बच्चे कठपुतली के खेल को पसंद करते हैं। खेल-खेल में शिक्षा की जटिलता को दूर करने के लिए यह बेहतर फामरूला साबित होगा। गणित और विज्ञान जैसे जटिल विषयों को कठपुतली के पात्रों में गढ़कर सरल ढंग से बच्चों की समस्या दूर की जा सकेगी। ऐसा पहली बार होगा।