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Chhattisgarh
Raipur Raipur बीजापुर/रायपुर. नक्सलियों ने 27 मार्च को बीजापुर के जंगल में पांच बड़े बिजली खंभों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस वजह से पूरा इलाका चार दिन से अंधेरे में डूबा है। विद्युत मंडल के सदस्य वीके जैन ने बताया कि फिलहाल 11 केवी लाइन से बिजली सप्लाई की जा रही है। 33 केवी लाइन के क्षतिग्रस्त खंभों को सुधारने का काम जल्द शुरू होगा। इसमें चार-पांच दिन लगेंगे।
मौसम ने भी विद्युत मंडल को परेशानी में डाल रखा है। शाम को आंधी-तूफान की वजह से गीदम के आसपास के गांवों में बिजली सप्लाई बंद हो गई। नक्सलियों का खतरा होने के कारण इसको देर रात को चालू करना संभव नहीं है। कल सुबह के बाद ही इस लाइन का फाल्ट ढूंढ़ना संभव होगा।
मद्देड़ और भोपालपटनम सबस्टेशन से 11 केवी लाइन से अस्थायी तौर पर बिजली सप्लाई की जा रही है। इससे भोपालपटनम के 80 और मद्देड़ के 20 गांवों में बिजली है। 31 मार्च को माओवादियों के प्रस्तावित दंडकारण्य बंद की वजह से सीएसईबी का अमला सुधार में जुटने से कतरा रहा है। वैसे भी बीजापुर में 25 साल पहले स्वीकृत स्टाफ में से थोड़े से लोग ही काम कर रहे हैं। छह माह पहले नक्सलियों ने विभाग के दो वाहन भी जला दिए थे।
भोपालपटनम के पंच खुशहाल खान ने बताया कि बीते साल ब्लैक आउट के बाद मिले दो जनरेटर में से एक जनपद कार्यालय व दूसरा हास्पिटल में काम कर रहा है। नल-जल योजना पूरी तरह ठप है। जनजीवन काफी हद तक प्रभावित हुआ है। इधर, उसूर ब्लाक के ज्यादातर गांव नक्सली समस्या के चलते बीते एक दशक से बिजली की सुविधा से महरूम हैं। वे इन हालातों के आदी हो चुके हैं। इतना ही नहीं बीजापुर के पीड़िया, मुरगान घोटुल, डौंडी तुमनार, मनकेली, गोरना, इसुलनार, पुसनार, बुरजी और तोड़का समेत दर्जनों गांवों का कमोबेश यही हाल है।
मौके का मुआयना
सीएसईबी के एई पीएल सिंह के मुताबिक बीजापुर घाटी से 3 किमी अंदर माओवादियों ने जिस जगह पर बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त किए हैं, वहां 28 और 29 मार्च को पहुंचकर विभाग की टीम ने मौके का मुआयना कर लिया है। जहां खंभे क्षतिग्रस्त किए गए, वह इलाका दुर्गम है। प्रेशर बम का भी खतरा है। एएसपी एमआर अहिरे ने बताया कि घटना के बाद से घाटी के आसपास फोर्स की गतिविधियां बढ़ा दी गई हैं। सुधार कार्य के लिए सीएसईबी की मदद के लिए अमला पूरी तरह से तैयार है।