जयपुर. नगरीय विकास विभाग ने जयपुर-दिल्ली रोड पर प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी अनुभवहीन कंपनी को देने की तैयारी कर ली है। कंपनी को प्रोजेक्ट देने के लिए सरकार का जबर्दस्त दबाव है। हालांकि कंपनी ने दो अनुभवी संगठनों को वर्किग पार्टनर बनाया है, लेकिन जेडीए अधिकारी इस पर राजी नहीं हैं। टेंडर की शर्तो के अनुसार इतना बड़ा प्रोजेक्ट इस तरह के काम करने का पूर्व अनुभव रखने वाली कंपनी को ही दिया जा सकता है।
नगरीय विकास विभाग और जेडीए के अधिकारियों को डर है कि कहीं बाद में स्पोर्ट्स सिटी का स्कैंडल बन गया तो उनके लिए जवाब देना भारी हो जाएगा। इस कंपनी को प्रोजेक्ट देने के लिए बढ़ते दबाव के कारण सार्वजनिक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सी.एस. राजन ने तो हाईपावर कमेटी की बैठकों में आना ही बंद कर दिया है।
नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव परविंदरसिंह पंवार कह चुके हैं कि वे गलत काम नहीं करेंगे, भले ही उनका तबादला कर दिया जाए। जेडीए आयुक्त डी.बी. गुप्ता भी यह कहकर बात को टाल चुके हैं कि प्रमुख सचिव पंवार प्रोजेक्ट देने के आदेश देंगे तो वे भी काम दे देंगे।
नौ कंपनियों का गठजोड़ :
पिंकसिटी स्पोट्र्स नौ कंपनियों को मिलाकर वर्ष 2005 में बनाई गई थी। स्पोट्र्स सिटी का प्रोजेक्ट भी तीन साल से प्रस्तावित है। ये कंपनियां अलग-अलग क्षेत्र की हैं। इनमें केवल एक कंपनी मॉरीशस की केनिंग इंवेस्टमेंट ही स्पोट्र्स क्षेत्र से संबंधित है। अनुभव की शर्त को पूरा करने के लिए ही पीजीए और सास्डा जैसी कंपनियों से एग्रीमेंट किया गया है।
क्या होगा स्पोर्ट्स सिटी में
बास्केटबाल, फुटबॉल, वॉलीबॉल, टेनिस, भारोत्तोलन, गोल्फकोर्स सहित सभी तरह के खेल मैदान।
खिलाड़ियों के लिए शिक्षण संस्थान, हॉस्टल, प्रदर्शनी एवं कन्वेंशन सेंटर, सूचना एवं प्रौद्योगिकी केन्द्र, मल्टीप्लेक्स, अस्पताल, रेस्टोरेंट, पांच सितारा होटल, आवासीय कॉलोनी, मेगा मॉल और अन्य व्यावसायिक सुविधाएं।
पहले भी विवाद में आई थी :
स्पोर्ट्स सिटी पहले भी विवाद में आ चुकी है। सरकार इसके लिए पहले विद्याधर नगर में जमीन उपलब्ध करवा रही थी। वन विभाग की आपत्ति के बाद जेडीए को फैसला बदलना पड़ा। अब यह दिल्ली रोड पर अचरोल के पास प्रस्तावित है।