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जनपथ से गुजरा संस्कृति का कारवां

जयपुर. diwas संगीत और नृत्य की लय-ताल पर अपने पारंपरिक स्वरूप में मरुभूमि के सुनहरी रंग बिखेरता राजस्थान दिवस समारोह रविवार को संपन्न हो गया। लोकतंत्र के मंदिर विधानसभा की भव्य पृष्ठभूमि में जनपथ पर जब राजस्थान के विभिन्न अंचलों के कलाकारों ने एक सुर और एक ताल पर कदम मिलाए तो संपूर्ण परिसर धोरांरी धरती के अनुपम सौंदर्य से निखर उठा।

राजस्थान के गौरवशाली वैभव को दिखाने के लिए 21 नयनाभिराम झांकियों का कारवां जब जनपथ से गुजरा तो दर्शकों के मुंह से बरबस ही निकल पड़ा ‘आ तो सुरागां नै सरमावे’। हर झांकी में संभाग के जिलों के प्रतीक चिह्न् और ऐतिहासिक संपदा को दर्शाया गया था।

शाम 5:45 बजे उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी जनपथ पहुंचे। राज्यपाल एस.के. सिंह, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, संस्कृति राज्यमंत्री उषा पूनिया और राजस्थान दिवस समारोह के मुख्य प्रायोजक वेदांत ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने उनका अभिनंदन किया। 5:50 बजे विधानसभा भवन के ऊपर से होते हुए सेना के हेलिकॉप्टरों ने जनपथ को गुलाब की पंखुड़ियों से पाट दिया। 61वीं कैवेलरी के जवान घोड़ों पर सवार होकर गुजरे।

फिर चला झांकियों व नाचते-गाते कलाकारों का कारवां। करीब एक घंटे के इस दौर में जनपथ पर संपूर्ण राजस्थान जीवंत हो उठा। सबसे पहले र्आई अजमेर संभाग की झांकियां। इनमें दरी निर्माण कला, मसाला निर्माण, टोंक के बीसपुर बांध और टोंक की बैंतबाजी को दर्शाया गया। भरतपुर की झांकी में फूलों की होली और मयूर नृत्य का नयनाभिराम दृश्य देखते ही बन रहा था। इसके पीछे थी बरसाने की लट्ठमार होली। फिर चरी और गैर नृत्य करते कलाकार।

बीकानेर की झांकी में गोगामेड़ी मेला, जूनागढ़ किला और ताल छापर के नजारे उकेरे गए। जयपुर संभाग की झांकी में अलवर और सवाईमाधोपुर की संस्कृति अधिक दिखाई दी। अलवर की झांकी में होप सर्कस का मॉडल बना था, पीछे थे खारिया व भपंग नृत्य करते कलाकार। जैसलमेर का सोनार किला, पटवों की हवेली, उदयपुर का बादल महल, रणकपुर और झालावाड़ के भगवान आदिनाथ के मंदिर की झांकी ने भी लोगों को लुभाया।

गालीबाजी : जयपुर विरासत फाउंडेशन व गौड़ विप्र लोकगीत मंडल ने शनिवार रात खूंटेटों के रास्ते में गालीबाजी का आयोजन किया। शंकर सुजन बारह भाई के उस्ताद रामरतन, ताड़केश्वर लोकगीत मंडल सहित अन्य मंडलों ने गालीबाजी सुनाई।

कल्याण लोकगीत मंडल ने ‘दिल जान पलंग पर आवौ, एहसान मानू तेरा..’ सुनाकर गुदगुदाया। अश्विनीकुमार पारीक के संयोजन में फाउंडेशन ने दिव्य भाटिया, विनोद जोशी ने बुजुर्ग फूलजी सर्राफ व कलाकारों का स्वागत किया। इस अवसर पर कलाकार ईश्वरदत्त माथुर, साहित्यकार आनंद माथुर और आलोक भट्ट को भी सम्मानित किया गया।





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