न्यूयार्क. हर दिन हमारी नाक हजारों खुशबू सूंघती है जिनमें से कई को हम आसानी से पहचान जाते हैं। शोधकर्ताओं ने अब खुशबू पहचानने की इस क्षमता का कारण खोज निकाला है।
अध्ययन के अनुसार बुरी खुशबू से जुड़ा नकारात्मक अनुभव हमारे मस्तिष्क में दर्ज हो जाता है और इस आधार पर हम खुशबुओं में फर्क करना सीखते हैं। इस अध्ययन के दौरान लोगों को हरी घास की कई तरह की खुशबुओं से रूबरू करवाया गया। इसके अलावा उन्हें घास जैसी खुशबू वाले रसायन भी सुंघाए गए।
पूरे अध्ययन के बाद यह देखा गया कि लोगों ने इन खुशबूओं को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं दी। और यहीं ऐसे कुछ आधार है, जिनके द्वारा हम खुशबुओं में फर्क करना सीख पाते हैं।
‘नार्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय’ के शोधकर्ता वेन ली के अनुसार, “यह एक क्रांतिकारी खोज है। इस आधार पर हम पर्यावरण की अथाह जानकारी को पहचाने और वर्गीकृत करने की क्षमता के बारे में जान पाएंगे।”