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फर्जी खातों से लाखों की हेराफेरी

जोधपुर. देश के कई शहरों से ड्राफ्ट चुरा कर फर्जी खातों के माध्यम से लाखों रुपए उड़ाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हो गया है। इसका सरगना दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया जिसे जोधपुर पुलिस यहां ले आई। उसने कई राज्यों में फर्जी खातों तथा हेराफेरी का राज खोला है।

फर्जी पहचान, फर्जी खाते
अशोककुमार नाम का यह सरगना असली तौर पर अलीगढ़ निवासी ओमप्रकाश कश्यप है। दिल्ली स्थित इस गिरोह में उसके अलावा मनोज, अनिल, रामकुमार और कुछ अन्य युवक है। मनोज गिरोह के लोगों के फर्जी पहचान पत्र बनाता है। उसने उनके जाली मतदाता परिचय पत्र तथा पैन कार्ड बना रखे हैं। इनसे उन्होंने फर्जी नामों से कई जगह फर्जी खाते खुलवा रखे हैं।

अनगिनत खाते
पुलिस अशोक उर्फ ओमप्रकाश के शिकोहाबाद बैंक में चार दिन का स्टेटमेंट देख हैरान रह गई। इस दौरान उसके खाते में चार लाख रुपए जमा हुए थे। आरोपी ने दिल्ली, यमुना विहार, कालकाजी, भागटक यूपी, शिकोहाबाद व गाजियाबाद में एचडीएफसी बैंक, सेंट्रल बैंक, एसबीबीजे, एसबीआई, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंचुरियन बैंक तथा सिंडिकेट बैंक में अशोक के नाम से दस खाते खुलवा रखे हैं। जोधपुर के अलावा बीकानेर, जयपुर, आगरा, इलाहाबाद, असम व दिल्ली में लाखों रुपए की हेराफेरी की है।

यों आया मामला सामने
छत्तीसगढ़ के रायपुर की यूको बैंक ने दिसंबर 07 में मालाराम जाट के नाम से डेढ़ लाख रुपए के तीन ड्राफ्ट जारी किए। ये ड्राफ्ट रजिस्टर्ड डाक से रेलवे मेल सर्विस के मार्फत यहां पहुंचे, मगर मालाराम को नहीं मिले। उनका भुगतान शिकोहाबाद (यूपी) की सिंडीकेट ब्रांच से अशोक कुमार निवासी दिल्ली के नाम से हो गया।

एएसपी सवाईसिंह गोदारा एवं डीएसपी धर्मेंद्रसिंह सागर के नेतृत्व में गठित टीम ने छानबीन शुरू की और शिकोहाबाद से अशोक कुमार की पहचान के दस्तावेज निकाले। इसकी दिल्ली पुलिस को जानकारी दी। दिल्ली में भी ऐसी हेराफेरी हो चुकी थी इसलिए वहां की पुलिस ने अशोक कुमार को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया। जोधपुर पुलिस रविवार सुबह उसे यहां ले आई और 10 दिन के रिमांड पर ले लिया।

डाक से चुराते हैं ड्राफ्ट
पूरे देश में सक्रिय गिरोह के सदस्य डाक विभाग तथा कोरियर कंपनियों के कर्मचारियों से मिले हुए हैं। वे डाक से जाने वाले ड्राफ्ट को बीच में निकाल उसमें दर्ज नाम काट कर अपना नाम लिख लेते हैं तथा उस पर प्रबंधक के हूबहू लघु हस्ताक्षर कर देते हैं। बाद में अन्य शहरों में जाकर अपने खातों वाली बैंकों की ब्रांच में ये चोरी के ड्राफ्ट जमा करवा देते हैं और भुगतान मूल ब्रांच से उठा लेते हैं।





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