जालोर.
डूडसी गांव की एक लड़की को भगाकर ले जा रहे दीक्षा धर्म से निष्कासित एक पूर्व जैन मुनि को बागरा पुलिस ने रविवार को रामसीन बस स्टैंड से गिरफ्तार किया। जैन मुनि के रूप में दीक्षा लेने वाले इस युवक से गत दिनों जैन समाज के मुनियों ने ‘ओघा’ छीनकर साधु वेश उतरवा दिया था। प्रसन्नदेवसूरी के नाम से पहचाने जाते रहे इस युवक को एसडीएम के समक्ष पेश किया गया, जहां से जमानत पर रिहा कर दिया गया।
पुलिस के अनुसार डूडसी निवासी एक व्यक्ति ने टेलीफोन पर बागरा पुलिस को सूचना दी कि उसकी बहन (२५) को साबरमती (अहमदाबाद) निवासी महेश कुमार उर्फ प्रसन्न विजय पुत्र झूमरमल जैन बहला कर भगा ले जा रहा है।
उसने बताया कि दीक्षा धर्म से निष्कासित इस युवक ने उसकी बहन को वश में कर लिया है। जिसके कारण वह परिवार के लोगों का कहना भी नहीं मान रही है। इस पर बागरा पुलिस ने रामसीन चौकी के हैड कांस्टेबल शराफत खां से बातचीत कर उन्हें रोकने की बात कही।
इसके बाद थानाधिकारी चंपाला पुलिस बल के साथ रामसीन बस स्टैंड पहुंचे। इस दौरान महेश कुमार और वह लड़की बस में बैठकर अहमदाबाद भागने की फिराक में थे। पुलिस ने लड़की के भाई की ओर से तस्दीक करने पर युवक और लड़की को पकड़ लिया।
पुलिस ने रविवार दोपहर दोनों को एसडीएम सुरेश नवल के निवास पर पेश किया, जहां से दोनों को जमानत पर रिहा कर दिया गया। यह युवक इसी लड़की को एक माह पहले भी भगाकर अपने साथ ले गया था। वहां पर लड़की उसके साथ कई दिनों तक रही। बाद में लड़की के परिवार वाले डीसा जाकर लड़की को वापस ले आए थे।
>> लड़की के भाई की सूचना पर पुलिस ने कार्रवाई की है। दोनों को पूछताछ पर सही जवाब नहीं देने पर गिरफ्तार कर एसडीएम के समक्ष पेश किया गया।
चंपालाल, थानाधिकारी बागरा
>> संदिग्ध लगने पर बागरा पुलिस ने महेश नाम के एक व्यक्ति को लड़की के साथ पकड़ा था। वह जैन साधु था या नहीं। इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।’
सुरेश पंडच्या, एएसपी, जालोर
पदवी छीन ली थी
साधु जीवन के विरुद्ध आचरण के कारण पारसधाम में इस युवक को दीक्षा धर्म से मुक्त कर दिया गया था। साथ ही उसे सांसारिक कपड़े पहनाकर गांव भेज दिया गया था। इस युवक ने 27-28 साल पहले पालीताणा में दीक्षा ली थी। बाद में रानीवाड़ा में उसे सूरी की उपाधि भी दी गई थी।