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सुप्रीम कोर्ट ने ‘सलवा जुडूम’ पर लगाया सवालिया निशान

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने नक्सल विरोधी आंदोलन ‘सलवा जुडूम’ पर सवालिया निशान लगाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जुडूम से जुड़े लोगों को हथियार दिए जाने संबंधी आरोपों पर राज्य सरकार के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है।

चीफ जस्टिस केजी बालकृष्णन और जस्टिस आफताब आलम की बेंच ने नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे इस आंदोलन पर अपनी टिप्पणी में कहा, ‘आप (राज्य सरकार) किसी (नागरिक) को हथियार देकर जान से मारने की अनुमति नहीं दे सकते।’ बेंच ने यह भी कहा कि किसी तटस्थ एजेंसी को इस बात की जांच और आकलन करना चाहिए कि क्या लोग जुडूम शिविरों से अपनी मर्जी से जुड़ रहे हैं।

कोर्ट ने ये टिप्पणियां उन दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कीं, जिनमें राज्य सरकार को सलवा जुडूम को कथित रूप से समर्थन और प्रोत्साहन देने से बचने का निर्देश देने की मांग की गई है। इनमें से एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन में शामिल नागरिकों को कथित रूप से हथियार मुहैया करा रही है।

बेंच ने कहा, ‘यह कानून और व्यवस्था का सवाल है। आप (राज्य सरकार) आईपीसी की धारा 302 के तहत अपराध को उकसाने वाले करार दिए जा सकते हैं।’ राज्य सरकार का पक्ष: इससे पहले राज्य सरकार ने इस बात से इनकार किया था कि जुडूम राज्य प्रायोजित आंदोलन है। उसने यह भी कहा था कि यदि जुडूम कार्यकर्ता कानून तोड़ते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।





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