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मूर्खता में निहित हैं अलग-अलग अर्थ

जीवन दर्शन. किसी व्यक्ति की ज्यादा समझदारी किसी के लिए मूर्खता का सबूत हो सकती है, तो किसी की मूर्खता अन्य व्यक्तिके लिए शिक्षाप्रद हो सकती है। दो किस्से हैं। एक बार ऐसे व्यक्तिने लॉटरी का टिकट खरीदा जिसकी पत्नी उसे गिनकर रुपए देती थी। भाग्य की मेहरबानी से उस व्यक्ति की एक लाख रुपए की लॉटरी निकल गई। वह खुशी से झूमता हुआ घर आया और अपनी पत्नी को इस संबंध में बताया।

पत्नी खुश होने की बजाय उस पर चिल्लाते हुए बोली- पहले यह बताओ, तुम्हारे पास लॉटरी के पैसे कहां से आए? इसमें पत्नी अपने पति को मूर्ख समझती है कि बिना पूछे पैसे खर्च कर दिए, तो पति पत्नी को मूर्ख समझता है कि लाख रुपए मिलने पर भी यह पैसे का हिसाब मांग रही है। खैर, दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं।

इसी प्रकार एक बार एक व्यक्ति अपने डॉक्टर के पास गया। उसका पैर टूट गया था। डॉक्टर ने प्लास्टर चढ़ाकर पूछा था - तुम्हारा रूम कहां है? व्यक्ति ने कहा - चौथी मंजिल पर। डॉक्टर ने सलाह दी - तुम अपना रूम बदल लो। एक हफ्ते तक सीढ़ियां मत चढ़ना-उतरना। व्यक्ति एक हफ्ते बाद डॉक्टर के पास आया। डॉक्टर ने उसका पैर चैक किया और कहा - अब तुम्हारा पैर ठीक हो गया है। अब तुम सीढ़ियां चढ़ सकते हो। वह व्यक्ति खुश होते हुए बोला - आपका बहुत-बहुत धन्यवाद डॉक्टर साहब, वरना मैं तो पाइप से चढ़ते-उतरते थक गया था। अब डॉक्टर उसे क्या कह सकता था।

हम कभी-कभी अपनी समझ के अनुसार शब्दों का अर्थ लेते हैं, इसी में कुछ चीजों का अर्थ कई बार बदल जाता है। मूर्ख दिवस पर हर व्यक्ति दूसरे को मूर्ख बनाने का प्रयास करता है। इसके लिए वह कई ऐसे शब्दों का प्रयोग करता है जिसका अर्थ दूसरे व्यक्ति के लिए अलग होता है।





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