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पर्यटन केंद्रों पर सतर्कता जरूरी

दृष्टिकोण. अगर मीडिया ने स्कारलेट कीलिंग की जघन्य और दुखद हत्या का मामला जोर-शोर से नहीं उठाया होता, तो संभवत: उसे दबा दिया जाता। जांच की शुरुआत में ही स्थानीय पुलिस ऐसी ही कोशिश करती प्रतीत हो रही थी। यहां तक कि स्कारलेट के शव का पहली बार पोस्टमार्टम करने वाला सिद्धांतहीन शख्स भी उसकी मौत डूबने से हुई बता रहा था। वह तो मीडिया की लगातार निगाह के कारण बाद में उसे कहना पड़ा कि स्कारलेट की हत्या हुई थी।

अपनी ही बात से इस प्रकार पलटने वाला व्यक्तिअगर डॉक्टर है, तो निश्चित तौर पर बेहद अजीब किस्म का डॉक्टर है। इस घटना की जघन्यता इससे कहीं अधिक खतरनाक संकेत की ओर इशारा करती है। हाल के दिनों में महिला पर्यटकों के साथ बलात्कार और उनकी हत्या की खबरें लगातार आ रही हैं। विदेशी पुरुष और महिला पर्यटकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी, लूट और हत्या की वारदातों का यह तो केवल एक अंश भर है। इनमें से अधिकांश मामले ड्रग से संबंधित होते हैं और मीडिया के मुताबिक ऐसे ज्यादातर मामले उन पर्यटकों से जुड़े होते हैं, जो घुमंतू प्रवृत्ति के होते हैं। यही वह पहलू है जिसे सर्वाधिक खतरा है।

पिछले कुछ वर्षो में भारत आने वाले पर्यटकों के प्रकार में काफी बदलाव आया है। देश में आने वाले पर्यटकों में युवा घुमंतू पर्यटकों की संख्या अधिक है। इन्हीं से देश को सर्वाधिक आय भी हो रही है, न कि पांच सितारा होटलों में ठहरने वाले पर्यटकों से। इन नए पर्यटकों की जीवनशैली न सिर्फ आरामतलब है, बल्कि ये स्थानीय लोगों से घुलने-मिलने में भी संकोच नहीं करते। उनके इस व्यवहार का गलत अर्थ निकाला जाता है।

वजह, अकसर स्थानीय लोग जो इन विदेशी युवा पर्यटकों के संपर्क में आते हैं, इनके नि:संकोची स्वभाव से परिचित नहीं होते हैं। ऐसे में वे इनके दोस्ताना व्यवहार को स्वच्छंदता समझने की भूल कर बैठते हैं या जानबूझकर इसका फायदा उठाना चाहते हैं। इस क्रम में जिस प्रकृति के शख्स से स्कारलेट की मुलाकात गोवा में हुई, ऐसे लोगों को दिल्ली के पहाड़गंज इलाके समेत राजस्थान के बहुत से पर्यटक स्थलों और मुंबई की तंग बस्तियों में आसानी से पाया जा सकता है। हालांकि कुछ अपवाद भी होते हैं।

इनमें से बहुत से लोग अपने आपको पर्यटक गाइड के रूप में पेश करते हैं और संभवत: इनमें से कई गाइड होते भी हैं, पर इस दिखावे के पीछे उनकी मुख्य मंशा पैसा और कीमती सामान गायब करने की रहती है और अगर मौका हाथ लग जाए, तो वे महिला पर्यटकों के साथ बलात्कार और विरोध करने पर उनकी हत्या करने से भी नहीं चूकते हैं। अभी बहुत दिन नहीं हुए जब दिल्ली में देर रात एयरपोर्ट से टैक्सी लेने वाली अधेड़ ब्रिटिश महिला के साथ बलात्कार कर उसकी नृशंस हत्या कर दी गई थी। इस मामले के दोषी टैक्सी ड्राइवर ने कबूल किया था कि लालच और वासना के हावी हो जाने पर उसने इस घटना को अंजाम दिया।

इस जैसे लोगों पर ही बहुत सावधानी और सतर्कता से निगाह रखने की जरूरत है। इसके बावजूद इस दिशा में बहुत अधिक सार्थक प्रयास नहीं किए गए हैं। सुनने में आया है कि हाल ही में दिल्ली में पर्यटकों को कंट्रोल रूम सरीखी सुविधा मुहैया कराई गई है। यहां वे अपनी शिकायतों को दर्ज करा सकते हैं। मसलन अगर वे बलात्कार, लूट या छेड़छाड़ की घटना के शिकार होते हैं तो रिपोर्ट दर्ज करा सकेंगे। समझ नहीं आता कि यह व्यवस्था कोई मजाक है या फिर एक और मूर्खता। महज कंट्रोल रूम की स्थापना पर्यटकों के प्रति अपराध कम नहीं कर सकती है।

क्या पर्यटन को बढ़ावा देने के जिम्मेदार अधिकारियों और पुलिस प्रशासन के लिए कुछ प्रभावी कदम उठाना संभव नहीं है? क्या पर्यटकों के संपर्क में आने वाले दलालों, गाइडों और बहुरूपियों की जांच-पड़ताल और उनसे पूछताछ नहीं की जा सकती? संदिग्ध पाए जाने वाले शख्स से कैसे निपटना है यह पुलिस ही बेहतर जानती है। स्पष्ट प्रतीत होता है कि इस तरह के लोगों को सभ्य बनने में एक पूरी पीढ़ी बीत जाएगी। फिर क्यों न इस संबंध में कुछ सुरक्षात्मक एहतियाती कदम उठाए जाएं? क्यों न मादक पदार्थो के तस्करों की जानकारी जुटाने और उन्हें समाप्त करने के क्रम में कुछ कड़े कदम उठाए जाएं? नशे के इन सौदागरों ने ही गोवा को एक अलग छवि प्रदान की है।

थाईलैंड की सरकार को बैंकॉक की सेक्स पर्यटन केंद्र की छवि बदलने में वर्षो लग गए और अभी भी वह आंशिक तौर पर ही सफल हुई है। उसकी यह मुहिम अभी भी जारी है। क्या अपने पर्यटन केंद्रों की छवि सुधारने के लिए इसी प्रकार का प्रयास भारत में नहीं किया जा सकता?

इस संबंध में हड़बड़ी में की गई प्रतिक्रियाओं से कोई हल निकलने वाला नहीं। अगर भारत आने वाला युवा विदेशी पर्यटक इसे ड्रग और सस्ती शराब के केंद्र के रूप में देखने लगेगा, तो अतुल्य भारत जैसे आकर्षक नारे बेमानी हो जाएंगे। जैसा कि अकसर होता आया है कि हर एक इसके लिए दूसरे को दोषी मान रहा है। पर्यटन से जुड़े लोग पुलिस को, तो पुलिस पर्यटकों को दोष दे रही है। इस प्रकार से सभी ऐसी घटनाओं के लिए अपने को छोड़कर दूसरे को दोष दे रहे हैं।

यही वह समय है जब किसी न किसी को तो समझना ही होगा कि स्थिति कितनी खतरनाक हो चुकी है। साथ ही, गोवा व मनाली जैसे पर्यटन केंद्रों के नशे व स्वच्छंद छवि समेत ठगों, कामुक व लालची लोगों से छुटकारा दिलाने के लिए यथार्थपरक व सार्थक प्रयास किसी को तो करने ही होंगे। ऐसे लोगों पर भी लगाम कसनी जरूरी है जो युवा विदेशी पर्यटकों को देखते ही उनके इर्द-गिर्द मंडराने लगते हैं। यह कोई असंभव कार्य नहीं है। बस इसके लिए दृढ़ता और भरपूर इच्छाशक्ति के साथ सामूहिक स्तर पर कार्य करने की जरूरत है। इन दोनों ही बातों के क्रम में हम बहुत अच्छे नहीं हैं, पर कम से कम प्रयास तो कर ही सकते हैं।

-लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं।





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