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सरकार बैंक को बंद करने पर आमादा

जयपुर. राजस्थान अरबन कोऑपरेटिव बैंक को राज्य सरकार लगभग बंद करने पर आमादा हो गई है और इसे चलाने में रुचि नहीं ले रही है। उधर घाटे वाले इस बैंक को सहकारी क्षेत्र का ही दूसरा बैंक लेने को तैयार है, लेकिन सरकार के अधिकारी इसके लिए तैयार नहीं हैं।

छह हजार से अधिक जमाकर्ताओं की राशि के साथ सरकार की शेयर राशि भी इससे संकट में फंसी है। इस बैंक में सरकार की करीब पौने दो करोड़ रुपए की शेयर पूंजी लगी है। दस करोड़ रुपए की जमीन बेचने के बाद भी यह बैंक नहीं चल पा रहा है। बैंक में कामकाज नहीं होने से जमाकर्ता और निवेशकों का पैसा निकालने में दिक्कत आ रही है।

इस बैंक ने जमाकर्ताओं को 30 अगस्त, 2005 से पैसा देना बंद कर दिया। उसके बाद से बैंक की तीन शाखाओं चांदपोल, सी-स्कीम और एमआई रोड में कोई लेनदेन नहीं हो रहा है। अलबत्ता इन शाखाओं में आने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन अवश्य उठ रहा है। तीनों शाखाओं में छह हजार जमाकर्ताओं की साढ़े छह करोड़ रुपए की राशि जमा है।

एजीएम के निर्णयों की अनदेखी

बैंक की साधारण सभा की 22 सितंबर, 2005 को हुई बैठक में किए गए निर्णयों को भी नजर अंदाज कर दिया गया। इसमें निर्णय किया गया था कि बैंक की जवाहर नगर स्थित भूमि को नहीं बेचा जाए, बैंक को अन्य सक्षम सहकारी बैंक में विलय के लिए रजिस्ट्रार को अधिकृत करने के साथ ही रिजर्व बैंक को भी इसके लिए कहा जाए। एजीएम के निर्णयों की अवहेलना करते हुए अन्य बैंक में विलय के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जवाहर नगर की भूमि को भी 10 करोड़ रुपए में बेच दिया और उसके पेटे सिर्फ 5 करोड़ रुपए ही मिल पाए।

प्रशासक काल में लापरवाही

इस बैंक में 22 जुलाई, 1997 से प्रशासक लगे हुए हैं। वर्ष 2001 में बैंक कमजोर श्रेणी में शामिल हो गया और 2004 बैंक हानि की स्थिति में आ गया। इसका एनपीए 320.35 लाख रुपए है और 2001 में यह 10 प्रतिशत से अधिक हो गया। बैंक में प्रशासक लगने के बाद सिर्फ दो बार 9 मई, 2005 और 22 सितंबर, 2005 को आमसभा हुई ।

दुविधा में जमाकर्ता

बैंक के कई जमाकर्ता अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई को लेकर काफी चिंतित हैं। गायत्री नगर के कन्हैयालाल और चांदपोल के हरीश खंडेलवाल जैसे कई लोग हैं, जिन्होंने दस-दस लाख रुपए तक जमा कराए हुए हैं। ऐसे बड़े जमाकर्ताओं को सिर्फ 50-50 हजार रुपए देकर इतिश्री कर ली गई। जमाकर्ता और निवेशक 32 माह से बैंक और सरकार के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

इस बैंक का मामला सामने आया है। इसे दिखवा रहे हैं। क्या हो सकता है, इसके लिए कागज मंगवाकर जांच कर रहे हैं। अगर वायबल होगा तो इसे जरूर चलाएंगे।
—नाथूसिंह गुर्जर, सहकारिता मंत्री

बैंक को सरकार सहायता दे अथवा अन्य बैंक में विलय करे ताकि लोगों का पैसा डूबे नहीं। जितने ऋण बांटे गए हैं, उनकी सीआईडी से जांच कराई जाए।
—गिरिराज गर्ग, पूर्व निदेशक, दि राजस्थान अरबन कोऑपरेटिव बैंक

किसी हालत में बैंक चालू हो तो लोगों में विश्वास पैदा हो। अभी सभी परेशान हैं।
—स्वरूप सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष, दि राजस्थान अरबन कोऑपरेटिव बैंक





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