इंदौर.
सिटी बस और मेट्रो टैक्सी में सफर करने वालों को अगले साल दो सुविधाएं मिलेंगी। एक है ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन (एएफसी) सिस्टम यानी बार-बार टिकट लेने की झंझट से बचाने वाला मेट्रो ट्रेवलर (रिचार्जेबल डेबिट) कार्ड। दूसरी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) जिसमें एबी रोड बीआरटीएस कॉरिडोर में खास ट्रैफिक सिगनल लगेंगे जो स्पेशल लेन में चलने वाली बसों और मेट्रो टैक्सी को पहले ग्रीन सिग्नल देंगे। 44 करोड़ के इन प्रोजेक्ट्स पर अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (एआईसी टीएसएल) ने काम शुरू कर दिया है। दोनों प्रोजेक्ट बीआरटीएस से संबद्ध हैं इसलिए अक्टूबर 2009 तक लागू करना ही होंगे।
दोनों योजनाओं की डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट 30 अप्रैल तक बन जाएगी। ये वर्ल्ड बैंक के मानकों के अनुसार बन सकें इसके लिए 7-8 अप्रैल को वर्ल्ड बैंक की टीम इंदौर में रहेगी। एआईसीटीएसएल के सीईओ चंद्रमौलि शुक्ल ने बताया 16 करोड़ रु. के एएफसी प्रोजेक्ट में ऐसा सिस्टम बनाया जाना है जिसमें एक ही रिचार्जेबल प्रीपेड कार्ड से पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े हर वाहन जैसे सभी रूट की सिटी बसों व मेट्रो टैक्सी में किराया चुकाया जा सके। आईटीएस प्रोजेक्ट को ट्रैफिक इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट एंड कंट्रोल सेंटर (टीआईएमसीसी) नाम दिया है। यह प्रोजेक्ट करीब 24 करोड़ का है। इसके तहत सिग्नल प्राइवेटाइजेशन करने का भी प्रस्ताव है।
लोगों को होगा फायदा
एएफसी सिस्टम लागू होने पर बार-बार किराया देने और टिकट लेने से मुक्ति मिलेगी। खुल्ले पैसों की परेशानी भी नहीं होगी।
200, 500 या 1000 रुपए के कार्ड होंगे जो रिचार्ज भी किए जा सकेंगे।
कार्ड का उपयोग शॉपिंग और खाने-पीने की चीजें खरीदने के लिए भी हो सकेगा।
बस या मैट्रो टैक्सी में एक मशीन रहेगी जिस पर से कार्ड गुजारना होगा। कार्ड कांटेक्ट लैस होगा यानी इसे स्वेप नहीं करना पड़ेगा।
टीएमसीसी शुरू होने के बाद स्पेशल लेन में चलने वाली सिटी बसों और मेट्रो टैक्सी को सिग्नल पर कम इंतजार करना होगा।
ऐसे मिलेंगे पैसे
दोनों प्रोजेक्ट पर करीब 40 करोड़ रु. खर्च होंगे। इसके अलावा चार करोड़ रु. मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करने और कंसल्टेंट नियुक्ति में लगेंगे। कुल 44 करोड़ में से 50 प्रश जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन, 30 प्रश राज्य सरकार और 20 प्रतिशत राशि ग्लोबल एन्वायर्नमेंट फैसिलिटी के मार्फत प्राप्त की जाएगी। मई तक डीपीआर स्वीकृति के लिए भेजने की तैयारी है।
ऑटो रिक्शा में सीएनजी किट
योजना में शहर के 10 हजार ऑटो रिक्शा में सीएनजी किट लगाने का प्रस्ताव है। एक किट दस हजार रु. में लगेगी यानी कुल 10 करोड़ का खर्च। इसे स्वीकृति मिलना बाकी है।