जयपुर. राज्य सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद के साथ पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश की तरह बोनस (100 रु. प्रतिक्विटंल) देने पर विचार कर रही है। इस संबंध में खाद्य विभाग की ओर से एक प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने बोनस के फायदे-नुकसान का आकलन करने के लिए सोमवार को मुख्य सचिव को निर्देश दिए, जिन्होंने 2 अप्रैल को उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है।
कितना बोझ पड़ेगा :
राजस्थान से लगे राज्यों में केवल मध्यप्रदेश ने ही 100 रुपए बोनस देने की घोषणा की है। अगर राजस्थान सरकार भी यही फैसला लेती है, तो अधिकतम 50 करोड़ रुपए का आर्थिक भार पड़ेगा। मध्यप्रदेश सीमा से जुड़े राज्य के जिलों कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़, सवाई माधोपुर, करौली, चित्तौड़गढ़ और धौलपुर में करीब 21 लाख टन पैदावार का अनुमान है।
सरकारी एजेंसियों का मानना है कि अगर इसमें से एक तिहाई गेहूं बिकने के लिए मध्यप्रदेश चला गया तो इससे राज्य सरकार को 4 फीसदी वैट व 1.6 फीसदी मंडी टैक्स के हिसाब से करीब 40 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा। इस तरह बोनस देने से राज्य सरकार पर 10 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
मध्यप्रदेश ने क्यों की घोषणा
पिछले साल मप्र में 3 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 57,447 टन गेहूं खरीदा जा सका था। इसलिए इस बार उसने बोनस देने का फैसला किया और इसी के चलते वहां शुरुआती सीजन में 28 मार्च तक केवल 8 दिन में 58,182 टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। राजस्थान में इस दौरान केवल 147 टन गेहूं खरीदा जा सका। लक्ष्य है 5 लाख टन गेहूं खरीदने का। यहां पिछले वर्ष 2 लाख टन लक्ष्य के मुकाबले 3 लाख 83 हजार 476 टन गेहूं खरीदा गया था।