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कई विधायकों के टिकट कटने का संकेत

जयपुर.lalपूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने भाजपा नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता विरोधी लहर किसी सरकार या पार्टी के खिलाफ नहीं होती, बल्कि व्यक्ति विशेष के खिलाफ होती है। बेहतर होगा कि विधायक व सांसद स्वयं अपने को बदलने की पेशकश कर दें वर्ना जनता उनको बदल देगी।

आडवाणी सोमवार को यहां विद्याधर नगर के उत्सव भवन में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। आडवाणी ने कहा कि गुजरात में इसी फामरूले के चलते पार्टी सफल रही और फिर से सत्ता में आई। सरकार विकास करवाती है, लेकिन अगर प्रतिनिधि की क्षेत्र में छवि ठीक नहीं है तो लोग उसे ही बदल डालेंगे। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी विधायक दल की बैठक में इसी आशय की बात कह चुकी हैं। अब आडवाणी के इस बयान को राजनीतिक हलकों में आने वाले चुनावों के लिए कई सदस्यों के टिकट काटे जाने की संभावना के रूप में देखा जा रहा है।

लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ हों

आडवाणी ने इस बात पर जोर दिया कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एकसाथ हों। इसके लिए संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए। आडवाणी ने महिलाओं, एक्स सर्विसमैन और युवाओं को पार्टी को स्वाभाविक पक्षधर बताते हुए युवाओं को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने राजस्थान में बिताए अपने प्रारम्भिक दिनों के संस्मरण भी सुनाए।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर ने सरकार की योजनाओं और विकास की गति का उल्लेख करते हुए सभी कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए जुट जाने का आह्वान किया। उन्होंने ‘हर कार्यकर्ता के लिए काम, हर काम के लिए कार्यकर्ता’ को संगठन का मूलमंत्र बनाने पर जोर दिया। राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता जसवंत सिंह ने कहा कि जो विचार लेकर हम चले थे, उसे अपनाने से पार्टी निश्चित तौर से सत्ता में आएगी।

उन्होंने सोनिया गांधी का नाम न लेते हुए उन पर कटाक्ष किया कि जिसे इस मिट्टी का एहसास नहीं, भाषा की समझ नहीं, वह भारत का राज कैसे चला सकती है। बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, कोषाध्यक्ष रामदास अग्रवाल, सह संगठन मंत्री सोदानसिंह, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष किरण माहेश्वरी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भंवरलाल शर्मा, हरिशंकर भाभड़ा और महेश शर्मा भी उपस्थित थे।

राजस्थानी को मान्यता दी जाए :

राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता जसवंत सिंह ने भाजपा कार्यसमिति की बैठक में राजस्थानी भाषा को मान्यता देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जब हर राज्य में वहां भाषा को महत्व दिया जा रहा है तो राजस्थानी को क्यों नहीं। उन्होंने डिंगल और पिंगल भाषा के विकास की बात कही ।





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