इंदौर. आधारभूत संरचनाओं के विकास के साथ इंदौर ऐसे शहरों की सूची में शामिल हो चुका है जहां बीस मंजिल से ज्यादा ऊंची इमारतें खड़ी की जा सकती हैं। आवश्यकता है तकनीकी रूप से भवन निर्माण में नए मापदंड तय कर उनका पालन करने की। यह बात ‘भूकंप सहित अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए सुरक्षित भवन निर्माण’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में संयुक्त राष्ट्र विकास परियोजनाओं के सलाहकार और वरिष्ठ आर्किटेक्ट वेद मित्तल ने कही।
कलेक्टोरेट परिसर में आयोजित इस परिचर्चा में विशेषज्ञों की समिति ने भवन निर्माण के विषय में दिए गए प्रतिवेदनों की जानकारी भी दी। उद्घाटन सत्र में कलेक्टर विवेक अग्रवाल ने बताया नए भवनों के निर्माण में विशेषज्ञों की राय कारगर साबित होती है। प्राकृतिक आपदाओं से आशंकित इलाकों में भवन की मजबूती संबंधि मापदंडों का पालन जरूरी है। इंदौर भूकंप जोन-३ में आता है इसलिए यहां तकनीकी मजबूती पर जोर देना जरूरी है। अन्य विशेषज्ञों ने बताया मप्र देश के उन राज्यों में शामिल है जिसने सुरक्षा के मदद्ेनजर शहरी नियोजन के नियमों में संशोधन और आवश्यकता के अनुसार बदलाव किए।
कार्यशाला में भवन की गुणवत्ता, नियमों में सख्ती, भूमि की संरचना और इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। चर्चा में अपर कलेक्टर रमेश भंडारी भी मौजूद थे। आपात स्थितियों के दौरान जनजीवन की सुरक्षा से जुड़े एमवाय अस्पताल, विद्युत केंद्र जैसे भवनों में विशेष मजबूती देने की बात भी हुई।