भोपाल.
गरमी शुरू होते ही बिजली ने दगा देना शुरू कर दिया है। हाइडल पावर प्लांट्स बंद होना शुरू हो गए हैं। नतीजतन पूरे प्रदेश में अघोषित बिजली कटौती का समय बढ़ता जा रहा है। राजधानी भोपाल छोड़ कर कोई भी शहर या गांव घोषित या अघोषित बिजली कटौती से अछूता नहीं है। दो घंटे से लेकर 20 घंटे तक बिजली कट हो रही है। जिला मुख्यालयों और तहसीलों में खाना भी चिमनी में ही बन रहा है। राज्य विद्युत मंडल सूत्रों के अनुसार बांधों में पानी कम हो जाने से बर्गी, पेंच, राजघाट और गांधी सागर में बिजली उत्पादन लगभग ठप हो गया है। बिरसिंहपुर थर्मल पावर प्लांट की भी एक इकाई ठप है।
एक तरफ सूरज की तपीश बढ़ती जा रही है और दूसरी तरफ बिजली की अधिकतम मांग के समय में प्रदेश में लगभग डेढ़ हजार मेगावाट की कमी हो गई है। भोपाल जिले की हालत यह है कि चाहे तहसील मुख्यालय बैरसिया हो या कोई गांव सभी जगह शाम का खाना तो अंधेरे में ही बनता है। बैरसिया में शाम को छह से आठ बजे तक बिजली नहीं रहती। इसके अलावा दिन में चार घंटे की कटौती अलग से होती है। जिले के सभी गांवों में शाम 6 से रात 10 बजे तक अंधेरा छाया रहता है।
विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी दावा करते हैं कि अघोषित बिजली कटौती नहीं हो रही लेकिन ग्रामीणों के अनुभव कुछ और ही हालत बयां करते हैं। यही स्थिति प्रदेश के सभी अंचलों की है। मालवा, महाकौशल और बुंदेलखंड सभी जगह जमीनी हकीकत यह है कि तहसीलों में छह से 12 घंटे तक गांव में 12 से 18 घंटे तक बिजली कट रही है। एक दिन छोड़ कर रात 12 से सुबह छह बजे के बीच चार घंटे बिजली दी जा रही है।