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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा आयोजित 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान रायपुर जिले में 302 नकलची पकड़े गए। जांजगीर-चांपा जिले में भी इतने ही नकल के केस बनाए गए। रायगढ़ जिले में सर्वाधिक 357 नकलचियों को पकड़ा गया।
रायपुर जिला पिछले सत्र में नकल के मामले में अव्वल था। तब जिले में 600 से ज्यादा केस पकड़े गए थे। सूत्रों ने बताया कि मौजूदा शिक्षा सत्र में बोर्ड के अंतिम पर्चे के दौरान उड़नदस्ते ने संवेदनशील विकासखंडों में मुहिम धीमी कर दी। कसडोल, बिलाईगढ़ और भाटापारा के परीक्षा केंद्रों में अपेक्षानुरूप छापे नहीं मारे गए। इसी वजह से नकल के केस में कमी आ गई।
बताते हैं कि नक्सल प्रभावित परीक्षा केंद्रों में उड़नदस्ते ने छापे ही नहीं मारे। बोर्ड की दोनों परीक्षाओं के दौरान केवल नकल के 4 केस बनाए गए। सरगुजा, जशपुर और बिलासपुर जिले में भी काफी कम केस बने। जांजगीर-चांपा जिले में माशिमं के चेयरमैन बीकेएस रे ने खुद डेरा डाल दिया था। इसी वजह से वह नकलचियों को मौका नहीं मिला। पिछले साल की तुलना में वहां भी कम केस पकड़े गए।
माशिमं के अधिकारियों ने बताया कि नकलची विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में नकल सामग्री अटैच करके अलग से सीलबंद लिफाफे मंगवाए गए हैं। नकल वाली उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन सामान्य कापियों के साथ नहीं होगा। मूल्यांकन से पहले मुख्यालय में नकलची विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिका का अध्ययन करने के बाद नकल सामग्री का परीक्षण किया जाएगा।
उसके बाद माशिमं की परीक्षा और परीक्षाफल समिति की बैठक में उनके केस पर चर्चा होगी। अंतिम निर्णय माशिमं की समिति ही करेगी। नकलची विद्यार्थियों पर कार्रवाई के लिए 9 बिंदु तय हैं। नकल के केस और परीक्षा केंद्र की स्थिति के मुताबिक निर्णय लिया जाएगा।
नतीजों पर रोक इसलिए नकलची छात्रों के रिजल्ट आमतौर से सामान्य विद्यार्थियों के साथ घोषित नहीं किए जाते। आम नतीजों के करीब एक माह बाद रिजल्ट जारी किया जाता है। अफसरों ने बताया कि नकल के केस की छानबीन के दौरान परीक्षा केंद्र प्रभारी और नकल पकड़ने वाले अफसर से पूछताछ की जाती है। नकल के आरोपों के घिरे विद्यार्थी को चिट्ठी भेजकर उसे पक्ष रखने को कहा जाता है। सभी पक्षों का अध्ययन करने के बाद नतीजे घोषित किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में विलंब होता है। यही वजह है कि नतीजे घोषित नहीं किए जाते।