News
Chhattisgarh
Raipur Raipur बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस धीरेंद्र मिश्रा की एकलपीठ ने बीएड परीक्षार्थियों द्वारा प्रस्तुत याचिकाओं की सुनवाई करते हुए 1 अप्रैल से होने वाली वार्षिक परीक्षा में उन्हें बैठने की अनुमति दे दी है। स्नातक परीक्षा में 50 फीसदी से कम अंक पाने वाले बीएड परीक्षार्थियों के वार्षिक परीक्षा में बैठने पर गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी, बिलासपुर, रविशंकर यूनिवर्सिटी, रायपुर ने रोक लगा दी थी। इससे प्रदेश भर के करीब 3000 बीएड परीक्षार्थी वार्षिक परीक्षा से वंचित हो रहे थे।
गौरतलब है कि दोनों यूनिवर्सिटी ने पूर्व में स्नातक परीक्षा में 50 फीसदी अंक पाने वाले आवेदकों को बीएड में प्रवेश देने से इनकार कर दिया था। आवेदकों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने आवेदकों की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए उन्हें बीएड में प्रवेश देने का आदेश दिया था।
स्नातक परीक्षा में 50 फीसदी के निर्धारित प्राप्तांक से कम अंक पाने के बावजूद हाईकोर्ट के आदेश से बीएड में प्रवेश पाने वाले अभ्यर्थियों ने वर्ष 2007-08 के सत्र में वार्षिक परीक्षा के लिए 180 दिन की ट्रेनिंग पूरी कर ली थी।
नियमानुसार उन्हें 1 अप्रैल से वार्षिक परीक्षा में बैठने की पात्रता दी जानी थी, परंतु दोनों यूनिवर्सिटी ने 1 मार्च 2008 को उन्हें बीएड परीक्षा का प्रवेश पत्र देने से इनकार कर दिया। बीएड के छात्र कैलाश चंद्रा, कुबेर, प्रधान, सच्चिदानंद दास, विनय अग्रवाल सहित अन्य ने इसके खिलाफ वकील सुनील ओटवानी, मनोज परांजपे, सलीम काजी एवं एएन पांडे के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
याचिका में कहा गया था कि चूंकि बीएड के छात्रों ने 23 अगस्त 2007 को बीएड प्रवेश के लिए बाकायदा काउंसलिंग में हिस्सा लिया। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश से उन्हें बीएड में प्रवेश प्राप्त हुआ तथा वार्षिक परीक्षा के लिए उन्होंने 180 दिन की निर्धारित सैद्धांतिक व प्रायोगिक ट्रेनिंग ली, इसलिए उनके वार्षिक परीक्षा में बैठने पर रोक नहीं लगाई जा सकती। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओँ के तर्को से सहमत होते हुए उन्हें 1 अप्रैल से आयोजित परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान की।