HomeNewsNational National

डिक्शनरी में ‘कोश’ का संकट

पुणेपिछले 60 साल से यहां के डक्कन कॉलेज में चल रहे दुनिया की सबसे बड़ी डिक्शनरी तैयार करने का काम अब आर्थिक संकट के कारण खतरे में पड़ गया है। 1948 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट संस्कृत के ऐतिहासिक सिद्धांतों की इनसाइक्लोपेडिक डिक्शनरी तैयार करने से जुड़ा है। हाल ही में वित्तमंत्री चिदंबरम ने अपने बजट भाषण में डक्कन कॉलेज को पांच करोड़ की सहायता देने की घोषणा की थी लेकिन इस डिक्शनरी प्रोजेक्ट को सिर्फ एक करोड़ रुपए ही मिलेंगे।

90 लाख से ज्यादा शब्द

कॉलेज निदेशक के. पड्डया के अनुसार यह राशि उन दुर्लभ ग्रंथों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया (डिजिटाइजेशन) पर खर्च की जाएगी जिनसे 90 लाख से अधिक संस्कृत शब्द लिए गए हैं। कई श्लोकों वाले ये ग्रंथ 1500 ई.पू. से 1900 ईस्वी के आसपास लिखे गए थे। इनके अलावा कई ग्रंथ वैदिक और संस्कृत साहित्य से भी संबंधित हैं। ये सभी दस्तावेज समय की मार के कारण गलते जा रहे हैं। इनकी खोज 1948 से 1972 के बीच विद्वानों के एक दल ने की थी। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में लगे थे

200 साल अंग्रेजी शब्दों की ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी

तैयार होने में 200 साल लग गए थे। संस्कृत साहित्य का इतिहास 3500 साल पुराना है और दुर्लभ गं्रथों से लिए जाने वाले शब्दों के संकलन में और समय लगने की संभावना है।

जरूरत 100 की, सिर्फ 12 लोग उपलब्ध

डक्कन कॉलेज के अध्यक्ष जीबी देगलुरकर के अनुसार एक करोड़ रुपए की राशि इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए अपर्याप्त है। यह प्रोजेक्ट अभी काफी अहम दौर से गुजर रहा है। इसके लिए कम से कम 100 लोगों की जरूरत है लेकिन अभी सिर्फ 10 प्रतिशत कर्मचारी ही यहां काम कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में यह काम आने वाले कई सालों तक पूरा होना मुश्किल है।

यहां कंप्यूटरों की संख्या कम है, कमरों की हालत काफी दयनीय है। आधुनिक फायरप्रूफ सुविधाओं की बात तो दूर, यहां रिसेप्शनिस्ट और वॉचमैन तक नहीं है। ट्रस्ट के संयुक्त निदेशक वीपी भट्टा के अनुसार अभी इस डिक्शनरी के आठ वाल्यूम के केवल तीन हिस्सों पर ही काम चल रहा है और अब तक औसतन 70 हजार शब्द और उनके अर्थ पर ही काम हो सका है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: