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Chandigarh Chandigarh फगवाड़ाफगवाड़ा के बॉडी बिल्डिर रणजीत पाल ने जर्मन के म्यूनिक शहर में एक साथ दो प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर गिनीÊा बुक के पिछले रिकार्ड तोड़ अपना नाम गिनीज बुक में दर्ज करवाने का रास्ता तैयार कर लिया है। रणजीत ने एक मिनट में २५५ बार रस्सी कूद कर फास्टैस्ट स्कीपर आफ दी वर्ल्ड का खिताब हासिल करने के साथ-साथ पैरलर बार डिप्स प्रतियोगिता में भी एक मिनट में ५५ डिप्स लगाकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
गौरतलब है कि गिनीज बुक में अभी तक का रिकार्ड 251 स्किीपिंग का है। रणजीत के इस लाजवाब प्रदर्शन और खेल की दुनिया में फगवाड़ा का शानदार प्रतिनिधित्व करने की सूचना से रणजीत का परिवार खुशी से सराबोर है।
एक मिनट में २४क् बार रस्सी कूदकर वर्ल्ड रिकार्ड बना चुके फगवाड़ा के बॉडी बिल्डर रणजीत पाल २९-३क् मार्च को जर्मन के शहर म्यूनिक में गिनीÊा बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड द्वारा करवाई जा रही इम्पोसिबिल्टी चैलेंजर प्रतियोगिता में भाग लेने गए हुए हैं। रविवार देर रात जैसे ही रणजीत ने अपने घर पर फोन कर परिजनों को अपनी सफलता की सूचना दी तो खुशी के मारे उनके पांव जमीन पर नहीं रहे।
रिश्तेदारों व दोस्तों के बधाई संदेश फोन पर आने का सिलसिला लगातार जारी रहा। बधाई देने वालों में विश्व चैंपियन प्रेम चंद डेगरा भी शामिल हैं। रणजीत के भाई सुनील पाबला ने भास्कर के साथ बातचीत के दौरान बताया कि इन दिनों प्रतियोगिताओं में यह रिकार्ड गिनीÊा बुक आफ र्किाडस में दर्ज हो जाएगा।
18 वर्ष की उम्र से शुरू की थी बाली बिल्डिंग
१८ वर्ष की उम्र में बाडी बिल्डिंग शुरु करने वाले रणजीत पाल ने १९८८ में २६ वर्ष की आयु में बाडी बिल्डिंग में मिस्टर पंजाब का खिताब जीता। इसके बाद वे मिस्टर इंडिया प्रतियाेगिता के प्रथम उप विजेता बने। आज रणजीत पाल बाडी बिल्डिंग के नैशनल जज है तथा फगवाड़ा में हैल्थ क्लब चलाते हैं। पदम श्री रमेश चंद डेगरा को अपना आदर्श मानने वाले रणजीत पाल को इस मुकाम तक पहुंचने में किसी भी प्रयोजक या सरकार का सहारा नहीं मिला।
उपलब्धियों का सफर और मौजूदा मुकाम
सन 2003 में फिटनेस कायम रखने के लिए रस्सी कूदना शुरु करने वाले रणजीत पाल धीरे धीरे इसमें इतने एक्सपर्ट हो गए कि उन्होंने वर्ल्ड रिकार्ड तक बना डाला। एक मिन्ट में 234 बार रस्सी कूदने के अपने ही रिकार्ड को उन्होंने 240 बार रस्सी कूद कर तोड़ा।
सन 2004 में रणजीत ने लिम्का बुक में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए ट्रायल दिया तथा 2005 से उनका नाम लिम्का बुक में आ गया। जिसकी खबरे विश्व स्तर पर फैलने के बाद सन 2005 में उन्हें रोप स्किपिंग फेडरेशन आफ इंडिया ने मेरठ में नेशनल कंपीटीशन के लिए बुलाया जहां उन्हें फास्टेस्ट स्क्पिर आफ इंडिया चुना गया। 2005 में ही मलेशिया में आयोजित तीसरी एशिया रोप स्किपिंग चैंपियनशिप में रणजीत पाल ने भारत की टीम का नेतृत्व किया।