नई दिल्ली/कोयंबटूर: केंद्र में सत्तारूढ़ यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे प्रमुख वामदलों, माकपा और भाकपा के लिए इस तालमेल का अनुभव सुखद नहीं रहा है।
भाकपा महासचिव एबी वर्धन और माकपा महासचिव प्रकाश करात दोनों ने स्पष्ट किया है कि वे न तो कांग्रेस के साथ कोई संयुक्त मोर्चा बनाएंगे और न ही भाजपा के साथ चुनावी तालमेल करेंगे। वामदलों ने कई मुद्दों पर सरकार को नाकाम बताते हुए कहा है कि महंगाई कम करने की दिशा में भी पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। वर्धन ने महंगाई के खिलाफ आंदोलन छेड़ने की भी घोषणा की है।
नई दिल्ली में मंगलवार को वर्धन ने कहा कि यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन देना ‘बहुत सुखद प्रयोग’ नहीं रहा। अलबत्ता उन्होंने इसे ‘विफल प्रयोग’ मानने से भी इनकार किया है। उन्होंने कहा कि एटमी करार पर मतभेद के बावजूद लोकसभा के चुनाव समय पूर्व होने की संभावना नहीं है।
वर्धन ने बताया कि वामदल देश की तरक्की में जरूरी परमाणु ऊर्जा के विरोधी नहीं हैं। वे तो देश के सार्वभौम हितों के लिए अमेरिका से एटमी करार के खिलाफ हैं। वर्धन ने बताया, ‘शुरू के दो साल तक यूपीए सरकार ने वाम दलों की हर बात पर ध्यान दिया, लेकिन बाद में वह एकतरफा निर्णय लेने लगी। वामदल सरकार पर दबाव नहीं डालना चाहते। वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि सरकार न्यूनतम साझा कार्यक्रम का पालन करे।’
तिब्बत पर रुख : वर्धन ने कहा कि वामदल भारत सरकार के इस रुख के समर्थक हैं कि तिब्बत चीन का हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘हम ‘एक चीन की नीति’ मानते हैं, जिसमें ताइवान भी उसका हिस्सा है’। वर्धन ने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का है और वामदल उस पर चीन का दावा सही नहीं मानते।
तीसरे विकल्प पर जोर : कोयंबटूर में माकपा की 19वीं कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पारित कर भाजपा और कांग्रेस पार्टी में अंतर करते हुए स्पष्ट किया है कि भाजपा को परास्त करने के लिए उसे अलग-थलग करने की नीति अपनाई जाएगी। राजनीतिक प्रस्ताव में गैर कांग्रेसी व गैर भाजपाई तीसरे विकल्प की संभावना तलाशने पर जोर दिया गया है।