जयपुर. केंद्र सरकार की नई खनिज नीति को लेकर माइंस एंड मिनरल्स (डवपलमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट-1957 को बदलने की तैयारी की जा रही है। इसका प्रदेश में मौजूद प्रधान खनिज (मेजर मिनरल्स) पर असर पड़ेगा।
एक्ट बदलने के संबंध में दिल्ली में सचिव स्तर पर राज्य के अधिकारियों के साथ विचार विमर्श किया जा रहा है। एक्ट में संशोधन को लेकर केंद्र व राज्य के खान विभाग के अधिकारियों की बैठकें होंगी। फेडरेशन ऑफ इंडियन माइनिंग एसोसिएशन के सदस्य मांगीलाल लुणावत के अनुसार माइंस एंड मिनरल्स एक्ट में संशोधन से राज्य के अप्रधान खनिज (मार्बल, कोटा स्टोन, सेंडस्टोन आदि) की नीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
प्रधान खनिजों में भी जो मेटेलिक मिनरल्स जैसे जिंक, लेड, मैग्नीज, आयरन, कॉपर आदि के लीज लेना आसान हो जाएगा। वन एवं पर्यावरण विभाग से एनओसी लेने के नियमों में शिथिलता नहीं बरती गई तो इन संशोधन का कोई फायदा होने वाला नहीं है।