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देवालय के पास खुले मदिरालय बंद होंगे

जयपुर. आबकारी विभाग ने वर्ष 2004-05 में शिथिलता के आधार पर प्रदेशभर में धार्मिक स्थलों के नजदीक खोली गई 134 शराब दुकानों को बंद करने के निर्देश जारी किए हैं। ये दुकानें पिछले तीन साल से संचालित हो रही थीं। इनमें जयपुर की करीब 80 दुकानें भी हैं। राजधानी की ऐसी कुछ दुकानों पर विभाग ने ताले भी लगा दिए हैं। देसी शराब और डोडापोस्त की दुकानों का आबंटन अभी बाकी है।

जयपुर के अलावा जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, झालावाड़ सहित अन्य शहरों में करीब 54 दुकानों को बंद करने का निर्णय किया गया है। इन क्षेत्रों के आबकारी कार्यालयों ने इन दुकानों को बंद करने के निर्देश दिए हैं।

जयपुर में बंद कराई जा रही 80 दुकानों में से करीब 65 दुकानें हाईकोर्ट के आदेशानुसार बंद कराई जानी थी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में धार्मिक स्थलों के पास की शराब की दुकानों को बंद करने का आश्वासन दिया था।

नई जगह के लिए प्रार्थना पत्र

राज्य सरकार जिन दुकानों को बंद करा रही है, उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित करने के लिए आबकारी विभाग ने प्रार्थना पत्र मांगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि दुकान संचालकों द्वारा अन्यत्र दुकान लगाने का आवेदन करने पर दुकान का नवीनीकरण कर दिया जाएगा।

देसी शराब और डोडापोस्त की दुकानें नहीं उठीं

राज्य में अंग्रेजी शराब की दुकानों का शतप्रतिशत उठाव हो चुका है, लेकिन राज्य में कई जगह देसी शराब की दुकानों का आबंटन नहीं हुआ है। डोडापोस्त और भांग की दुकानों का भी यही हाल है। विभाग ने इन दुकानों के आबंटन के लिए फिर से कार्रवाई शुरू की है।

इनका कहना है

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार धार्मिक स्थलों के आसपास 134 दुकानों को बंद करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इन दुकानों को अन्य स्थानों के लिए नवीनीकरण किया जाएगा।
-सी.पी.व्यास, आबकारी आयुक्त

जयपुर में धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित दुकानों को बंद कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
-जगमोहन मीणा, जिला आबकारी अधिकारी, जयपुर

अब भी 160 दुकानों को शिथिलता

राज्य में 134 दुकानों को बंद करने के निर्णय के बाद भी राज्य में 160 दुकानों को शिथिलता मिली हुई है। इनमें सिनेमाघर और स्कूलों के आसपास वाली दुकानें हैं। धार्मिक स्थलों के पास वे ही दुकानें संचालित होंगी जो 15 से 20 सालों से उसी क्षेत्र में संचालित हो रही हैं।

1780 करोड़ की आय

आबकारी विभाग को वर्ष 2007-08 में 1720 करोड़ रुपए लक्ष्य के मुकाबले 1780 करोड़ रुपए की आय हुई है। इसी प्रकार जयपुर वृत्त में 1037 करोड़ के मुकाबले 1051 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है।





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