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सूने रहे स्कूल नहीं आए बच्चे

बिलासपुर. राज्य शासन द्वारा 30 अप्रैल तक स्कूल खोलने व कक्षा में पढ़ाई कराने संबंधी योजना की बोहनी ही खराब हो गई। स्कूलों में शिक्षकों ने तो उपस्थिति देने का प्रयास किया, पर बच्चों ने स्कूल जाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। शहर व आसपास के स्कूलों में छात्रों की संख्या शून्य रही।

शासन के निर्देशानुसार एक से तीस अप्रैल के बीच लगने वाली कक्षा में छात्रों को कोर्स से अलग हटकर ज्ञान दिया जाएगा। इसमें सामान्य ज्ञान, स्पोकन इंग्लिश के अलावा अन्य पढ़ाई भी शामिल है। इस योजना के पहले दिन ही स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या शून्य रही, जिससे माह के अंत तक स्थिति को लेकर शिक्षाधिकारी चिंतित दिखाई दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि आमतौर पर परीक्षा समाप्त होने के बाद गर्मी की छुट्टियां प्रारंभ मानी जाती हैं, लेकिन इस साल सरकार ने इसमें थोड़ी कड़ाई की है।

छात्रों को परीक्षा समाप्त हो जाने के बाद भी एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक स्कूल जाना होगा। छात्रों ने परीक्षा तो दे दी, लेकिन रिजल्ट अभी नहीं आया है। ऐसी स्थिति में छात्रों को कोर्स के अलावा अतिरिक्त योग्यता देने का प्रयास किया जाएगा। इस संबंध में डीईओ बीएल र्कुे ने बताया कि यह शासन की कोई नई योजना नहीं, बल्कि रुटीन ही है। शिक्षा विभाग का सत्र 16 जून से प्रारंभ होकर 30 अप्रैल तक चलता ही है।

यह बात अलग है कि 16 से 30 जून का समय छात्रों के लिए न होकर शिक्षकों के लिए होता है। छात्र 1 जुलाई से ही स्कूल जाते हैं। इसी तरह बोर्ड परीक्षाओं की समाप्ति मार्च माह में ही हो जाती है, जिससे छात्र छुट्टी पर चले जाते हैं। छात्रों की मानसिकता है कि परीक्षा हो गई तो स्कूल जाने का औचित्य ही क्या है? इसके विपरीत शासन ने इस साल शिक्षासत्र का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश देते हुए छात्रों को 30 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से स्कूल में उपस्थिति होने के निर्देश दिए हैं।

इसके अंतर्गत जिनकी परीक्षा नहीं हुई है, वे छात्र तो स्कूल में उपस्थित होंगे ही, लेकिन जिनकी परीक्षा हो चुकी है उन्हें भी स्कूल में उपस्थिति देनी होगी। श्री र्कुे ने बताया कि अप्रैल में गर्मी पड़ने के कारण स्कूल लगाने का कोई समय निर्धारित नहीं किया गया है। इसके लिए हेडमास्टरों को अधिकार दिया गया है, वे अपनी व बच्चों की सुविधानुसार स्कूल का समय तय कर सकते हैं। पहले दिन स्कूल में छात्रसंख्या शून्य रहने के संबंध में उन्होंने कहा कि चूंकि इस योजना का यह पहला वर्ष है, जिससे इसे अमल में लाने व छात्रों को जागरूक करने में थोड़ा समय लग सकता है।





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