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रेडक्रास के ब्लड बैंक में ताला

रायपुर. मेडिकल कालेज परिसर की शासकीय बिल्डिंग में संचालित ब्लड बैंक में सोमवार से ताला जड़ दिया गया है। रेडक्रास सोसायटी द्वारा संचालित बैंक के पदेन अध्यक्ष कलेक्टर हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी इसके सचिव हैं, लेकिन सरकार के आला अफसरों को पूरे घटनाक्रम की भनक तक नहीं हैं। रेडक्रास के चेयरमैन डा. एआर दल्ला ने भी इस मामले से हाथ खड़े कर दिए हैं।

उन्होंने ‘भास्कर’ को बताया कि सोसायटी ने अहमदाबाद की संस्था प्रथमा को नो प्राफिट नो लास पर ब्लड बैंक संचालित करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। वहां क्या हो रहा है, मुझे पूरी जानकारी नहीं है। मैं टिप्पणी नहीं कर सकता। जानकार सूत्रों ने बताया कि 6 मार्च को प्रथमा के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश मोहत्ता ने सीईओ रजनीश बख्शी सहित 14 तकनीशियनों व दो मेडिकल आफिसर को नौकरी से हटाने की नोटिस दी थी। नोटिस में कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने की जानकारी देते हुए कहा गया था कि कंपनी छत्तीसगढ़ में ब्लड बैंक का संचालन बंद कर रही है।

इसकी सूचना रेडक्रास सोसायटी के चेयरमैन समेत तमाम पदाधिकारियों को दी गई थी। नोटिस मिलने के बाद सोसायटी की बैठक हुई। उसमें यह नतीजा निकला कि अत्याधुनिक मशीनों को संचालित करने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं है। ऐसी दशा में सोसायटी ने फिर संस्था के पदाधिकारियों को मनाया। 28 मार्च को संस्था ने संचालन की मंजूरी दे दी। उसके बाद नए सिरे से नियुक्ति की कवायद चालू हो गई। यही बात ब्लड बैंक के स्टाफ को खल गई। सोमवार को स्टाफ ने संस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और पत्रकार वार्ता में कई गंभीर आरोप लगाए।

जानकार सूत्रों ने बताया कि रेडक्रास के ब्लड बैंक में पिछले चार-पांच महीने से प्रथमा के अफसरों व स्टाफ के बीच विवाद चल रहा था। महीने भर पहले प्रथमा के सीईओ श्री बख्शी और स्टाफ के बीच धक्का-मुक्की तक हो गई थी। स्टाफ के कुछ लोगों ने सीईओ पर मारपीट का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत की थी। राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन को भी चिट्ठी लिखकर कर्मचारियों ने दुखड़ा सुनाया था।

राज्यपाल से की गई शिकायत में यह आरोप लगाए गए थे कि सीईओ निशुल्क ब्लड लेने आने वालों के साथ र्दुव्‍यवहार करता है। कर्मचारियों को ब्लड न होने की झूठी गवाही देने के लिए भी उकसाया जाता है। सीईओ की बात नहीं मानने पर डांट फटकार सुननी पड़ती है। राज्यपाल निवास से शिकायत की जांच की गई थी। सीईओ बख्शी ने अपना स्पष्टीकरण भी दिया था। उसके बाद ऐसा माना जा रहा था कि विवाद शांत हो गया।





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