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स्कूलों के भी होंगे राशनकार्ड

रायपुर. मिड-डे मील के चावल की अफरा-तफरी रोकने खाद्य और शिक्षा विभाग ने नए प्रयोग का फैसला किया है। अब परिवारों की तर्ज पर स्कूलों के भी राशनकार्ड बनाए जाएंगे। परिवार के मुखिया की जगह हेडमास्टर का नाम व तस्वीर होगी। सदस्यों की जगह छात्रों के नाम व संख्या होगी। यह सिस्टम नए सत्र से लागू कर दिया जाएगा।

स्कूली राशनकार्ड को पहचानपत्र की भांति उपयोग में लाया जाएगा। इसमें इस बात का जिक्र होगा कि संबंधित स्कूल के लिए किस राशन दुकान को कितना खाद्यान्न आवंटित हुआ। स्कूल के हेडमास्टर ने कब और कितना राशन उठाया? अब तक प्रक्रिया अपनाई जाती रही है कि योजना के तहत केंद्र से मिलने वाले चावल के कोटे को खाद्य विभाग शिक्षा विभाग को जारी कर देता है। राशन दुकानों से पंच, सरपंच, हेडमास्टर या उनके प्रतिनिधि, खाना बनाने वाले ठेकेदार इसका उठाव करते हैं।

चावल ले जाने वाले व्यक्ति सही हैं या गलत, इसकी पहचान के लिए कोई पत्र या पहचानपत्र जारी नहीं किया जाता। इसकी वजह से कई दफे फर्जी लोगों ने चावल उठा लिया। अफसरों के अनुसार राशन दुकानों से चावल देने का कोई अधिकृत सिस्टम नहीं होने की वजह से सरपंचों और दुकानदारों के बीच मिलीभगत से भी कई बार चावल की अफरा-तफरी के मामले सामने आए। गड़बड़ी के बाद फूड और शिक्षा विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। फूड विभाग का मानना है कि उनका काम कोटे के अनुसार चावल राशन दुकानों तक पहुंचाना है। खास बात यह कि नए सिस्टम के लिए स्कूल शिक्षा और खाद्य विभाग के बीच सहमति बन गई है। आज खाद्य सचिव डा. आलोक शुक्ला ने खाद्य विभाग की समीक्षा में मिड-डे मील में नए सिस्टम पर प्रमुखता से चर्चा की।

एक नजर में

स्कूल 56187 -

प्राइमरी - 37062,

कुल छात्र 56.22 लाख

मिड-डे मील - प्राइमरी के 33.564 लाख छात्रों को





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