लंदन. एक अध्ययन से पता चला है कि अब हैजा के फैलने की भविष्यवाणी ‘उपग्रह सेंसरों’ के द्वारा की जा सकेगी। इससे इस महामारी से पीड़ित देशों को राहत मिलेगी।
हैजा के कीटाणुओं के पनपने की संभावना नदियों, खाड़ियों और कटिबंधीय क्षेत्रों में ज्यादा होती है। अमेरिका के ‘मैरीलैंड विश्वविद्यालय’की रीता कालवेल ने बताया, ‘‘वैज्ञानिकों ने समुद्र तल, उसके तापमान और इस महामारी के बीच सीधा संबंध स्थापित कर लिया है। अब हम उपग्रह के माध्यम से इसकी निगरानी करके हैजा की भविष्यवाणी कर सकते हैं।’’
उन्होंने कहा कि इससे इस बीमारी के फैलने से पहले ही इसके इलाज की व्यवस्था कर ली जा सकेगी। यह एक बड़ी समस्या है और यह सारा कुछ जलवायु परिवर्तन से भी संबंधित है। गौरतलब है कि हैजा महामारी बहुत समय से दुनिया के सामने एक चुनौती है।