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कालेज लाइफ मिस करती हूं सारा

दिल्ली 2007 की मिस मध्यप्रदेश चुनी गई सारा खान भोपाल की रहने वाली हैं। वहीं उनकी पढ़ाई-लिखाई भी हुई। भोपाल में रहते हुए सारा ने लगभग 48 विज्ञापन फिल्में भी कीं। इन दिनों वे स्टार प्लस पर प्रसारित धारावाहिक ‘विदाई’ में साधना का किरदार निभा रही हैं। हाल ही में दिल्ली आई सारा खान ने वुमन भास्कर के लिए रेणु खंतवाल से बातचीत की।

सारा अभी आपने अपनी स्कूली शिक्षा ही पूरी की है और आप काम में जुट गई हैं। क्या पढ़ाई बीच में छूट जाने का दुख नहीं है?

बिलकुल है, हर इंसान की तरह मैं भी अपनी कॉलेज लाइफ एंज्वॉय करना चाहती थीं। मैंने कॉलेज में एडमिशन लिया था। तीन महीने मैं कॉलेज भी गई उसके बाद मुझे यह सीरियल ऑफर हो गया और मैं भोपाल से मुंबई आ गई। इन तीन महीने में मैंने कॉलेज में खूब एंज्वॉय किया और तीन साल की मौज मस्ती तीन महीने में ही कर डाली।

यह आपका पहला धारावाहिक है?

नहीं, इससे पहले मैंने डीडी मध्यप्रदेश के लिए कई कार्यक्रमों में उदघोषक का काम भी किया था।

धारावाहिक में आप अपने माता-पिता का विरोध करके एक कम दिमाग व्यक्ति से शादी कर लेती हैं। क्या इसे आप सही कदम मानती हैं?

इस मुद्दे को दो नज़रियों से देखा जा सकता है। पहला यह कि धारावाहिक में हम दो बहनें हैं, मैं गोरी और सुंदर हूं जबकि मेरी बड़ी बहन सांवली है। मेरी बहन के लिए जो भी रिश्ता लेकर आता है वह मुझे पसंद कर लेता है और दीदी को मना कर देता है। इस नज़र से यह छोटी बहन का बड़ी बहन के लिए त्याग है। दूसरे नज़रिए से देखें तो अपने माता-पिता का विरोध करके एक कम दिमाग के व्यक्ति से शादी करना समझदारी भरा कदम नहीं है।

धारावाहिक में पहले नज़रिए को अहमियत दी गई है।

गोरे और सांवले रंग के भेद को लेकर समाज के नज़रिए पर क्या कहेंगी?

यही कि अब लोगों को अपनी सोच बदल देनी चाहिए और इंसान के गुणों की तरफ ध्यान देना चाहिए। ऊपर वाले ने जिसे जो रंग दिया है उसे उसी रूप में स्वीकार करें। विरोध अवगुणों का हो, रंग का नहीं।

ऐसी कौन सी पांच मुख्य समस्याएं हैं जिनका सामना इस समय लड़कियों/महिलाओं को करना पड़ रहा है? सबसे बड़ी समस्या तो इस समय दहेज की है। लड़कियों को लेकर लोगों की सोच का छोटा होना जिस कारण आज भी हमारे समाज में लड़कियों को बोझ समझा जाता है और कई माता-पिता बिना सोचे समझे अपनी बेटियों की शादी कर लेते हैं। हमारे समाज में कई औरतें ऐसी हैं जिनके पति उनके प्रति ईमानदार व वफादार नहीं हैं। पति का ध्यान घर-परिवार व पत्नी से ज्यादा बाहर की औरतों पर है। ये सब वे जानती हैं लेकिन कुछ कर नहीं पा रहीं। स्र लड़कियों को पढ़ाने और काम करने की स्वतंत्रता न होना, यानी बेटा और बेटी में फर्क करना। औरत से ही हर प्रकार के समझौते और त्याग की उम्मीद करना।

औरत इन सभी समस्याओं से कैसे बाहर आ सकती है?सभी चीजों के विषय में गंभीरता से सोचकर और अपने निर्णय खुद लेकर वह समस्याओं को काफी हद तक सुधार सकती हैं।

बहुत सी महिलाएं पति की शराब और सिगरेट की लत से बहुत परेशान हैं। उन्हें क्या सलाह देंगी?पहले प्यार से मनाएं यदि प्यार का असर ज्यादा न नज़र आए तो पति से अपनी नाराज़गी व्यक्त करें। बात करना बंद कर दें, साथ खाना खाना बंद कर दें। आपसे प्यार करते होंगे तो जरूर सुधर जाएंगे और आपका कहना भी मानेंगे।





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l.n.tiwari
Thursday, 3rd Apr 2008, 1:38
i like her statment