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मेडिकल शिक्षा के पूर्ण निजीकरण की सिफारिश

नई दिल्ली: योजना आयोग ने मेडिकल शिक्षा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए पूर्णत: खोलने की सिफारिश की है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता युक्त मानव संसाधनों की फौरी जरूरत पूरी की जा सके। इसके साथ ही आयोग ने उच्च शिक्षा की सुविधाओं के विस्तार में भी निजी भागीदारी की सिफारिश की है।

आयोग के सदस्य अनवरुल होदा की अध्यक्षता में गठित सेवा क्षेत्र के उच्चस्तरीय समूह ने ये सिफारिशें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पेश की हैं। समूह के अनुसार, ‘देश में विशेषज्ञों से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक सभी स्तरों पर मानव संसाधन की आपूर्ति बढ़ाना बहुत जरूरी है। इसके अलावा उनकी गुणवत्ता बढ़ाने की भी जरूरत है।’

समूह का दृष्टिकोण है कि इसे पूरा करने का एकमात्र रास्ता मेडिकल चिकित्सा क्षेत्र को पूरी तरह निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोलना है। कंपनियों को जिस तरह र्न्िसग कॉलेज खोलने की अनुमति दी गई है, उसी तरह मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की स्थापना की अनुमति दी जानी चाहिए।

हवाई यात्रा हो सस्ती, पर्यटन को मिले बढ़ावा समूह ने पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार से कहा है कि वह उड्डयन टर्बाइर्न ईधन की लागत घटाने के लिए देश भर में वैट की मानक दर 12.5 फीसदी को ही स्वीकार करेर्। ईधन की लागत घटने से हवाई यात्रा का किराया कम होगा।





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