लंदन: अब तक यह माना जाता रहा है कि मोटापे के शिकार लोगों को डायबिटीज और हृदय रोग का ज्यादा खतरा होता है, लेकिन ब्रिटेन में मेयो क्लीनिक के शोधकर्ताओं का कहना है कि आमतौर पर सामान्य वजन के लोगों के शरीर में यदि फैट की मात्रा ज्यादा है तो उन्हें भी इन बीमारियों का उतना ही जोखिम हो सकता है। सामान्य वजन का मोटापा : शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में सामान्य वजन वाले लोगों के शरीर में भी अतिरिक्त फैट की उपस्थिति के कारण मोटापे के लक्षण पाए हैं। शोधकर्ताओं ने इस परिस्थिति को ‘सामान्य वजन का मोटापा’ बताया है, जिसके कारण हर दस में से आठ लोगों को हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा बना रहता है। कैसे करें निर्धारण : शोधकर्ताओं ने बताया कि बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की तुलना यदि शारीरिक फैट की मात्रा से की जाए तो सेहत पर खतरों का निर्धारण बेहतर तरीके से हो सकता है।
इस अध्ययन के निष्कर्र्षो से हृदय रोगियों के बेहतर इलाज की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को बल मिलने की उम्मीद है। शोधकर्ताओं ने डॉक्टरों को बीएमआई पर ज्यादा भरोसा करने की बजाय व्यक्ति के शारीरिक वसा परीक्षण को अहमियत देने की सलाह दी है।
‘मोटापे को बेहतर ढंग से परिभाषित करने के लिए ‘सामान्य वजन का मोटापा’ नई शब्दावली है। मोटापे की सही व्याख्या अतिरिक्त शारीरिक वसा से ही की जा सकती है’।
- डॉ. फ्रांसिस्को लोपेज जिमेनेज, मेयो हॉस्पिटल