लंदन: ब्रिटेन के चिकित्सकीय विशेषज्ञों ने पहली बार इस धारणा को चुनौती दी है कि तपेदिक यानी टीबी का बैक्टीरिया बीमारी से पीड़ित व्यक्ति द्वारा थूके गए बलगम के कारण तुरंत फैल जाता है।
लीसेस्टर और लंदन यूनिवर्सिटी के इन विशेषज्ञों का दावा है कि टीबी के बैक्टीरिया में वसा का एक आवरण होता है, जिसके कारण यह न सिर्फ लंबे समय तक जीवित रहता है, बल्कि टीबी के उपचार की दवाओं के लिए प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित कर लेता है।
लीसेस्टर यूनिवर्सिटी में क्लीनिकल माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रो. माइक बेरर ने कहा कि टीबी के बैक्टीरिया के जीवन चक्र की पहचान करना अब तक संभव नहीं हो सका है। इसी कारण इस बीमारी के विश्वव्यापी फैलाव को रोक पाना मुश्किल हो रहा है।
गौरतलब है कि टीबी की बीमारी से दुनिया भर में प्रति मिनट चार लोगों की मौत हो जाती है। शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि टीबी के मरीज द्वारा थूके गए बलगम में मौजूद बैक्टीरिया लंबे समय तक जीवित रह सकता है। यही कारण है कि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल जाता है।