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संकट के बादल

जयपुर. पाले के बाद अब मौसम ने रबी की फसलों पर कहर ढाया है। पिछले चार-पांच दिनों से वर्षा, ओले व अंधड़ से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी फसल आड़ी हो गई है। ओलों से सरसों व चने की फलियों से दाने बिखरकर मिट्टी में मिल गए हैं।

आपदा राहत प्रबंधन विभाग ने सभी कलेक्टरों से फसली नुकसान की रिपोर्ट मांग ली है। विभाग के प्रमुख शासन सचिव सीके मैथ्यू के अनुसार बिजली गिरने से प्रदेश में मरे चार लोगों के परिजनों को आपदा राहत कोष से एक-एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने के निर्देश संबंधित कलेक्टरों को दिए गए हैं। उनके अनुसार अलवर जिले में 15 से 20 प्रतिशत नुकसान आंका गया है।

उधर, कृषि विभाग को अभी तक केवल जयपुर जिले में कोटपूतली एवं पावटा क्षेत्र में ही फसली नुकसान की सूचना मिली है। संयुक्त निदेशक अनिल माथुर के अनुसार मौसम में बदलाव से कोटपूतली एवं पावटा में गेहूं एवं जौ की फसलों में 5 से 7 फीसदी नुकसान होने का अनुमान है। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से विभाग को फसली नुकसान की सूचनाएं अभी नहीं मिली हैं।

ओलों से नुकसान:

दूसरी ओर, बीकानेर इलाके में ओले गिरने व वर्षा से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि खेतों में इन दिनों फसलें पकने की अवस्था में हैं। नोखा, कोलायत, सोमलसर, श्रीडूंगरगढ़ व खाजूवाला क्षेत्र में बारिश, आंधी व ओलों ने खेतों में खड़ी गेहूं, सरसों व चने की फसल को बर्बाद कर दिया है।

श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ जिले में फसलों को नुकसान का आकलन किया जा रहा है। आंधी से गेहूं की फसल में 10 से 15 फीसदी नुकसान और सरसों के दाने काले पड़ने की आशंका है। श्रीगंगानगर जिले में 2.75 लाख हेक्टेयर में सरसों की फसल में पाले से तीन-चौथाई नुकसान पहले ही हो चुका है। शेखावाटी इलाके में पाले से गेहूं की करीब 30 फीसदी फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है। अब मौसम की मार से गेहूं का उत्पादन 10 से 20 फीसदी कम होने के आसार हैं।

ईसबगोल में नुकसान

मौसम बदलने से ईसबगोल की फसल को ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। बीकानेर क्षेत्र में खेतों में खड़ी ईसबगोल की फसल में 80 फीसदी तक खराबा बताया जा रहा है।

रेगिस्तान में ओले

राज्य में मौसम का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी रेगिस्तानी इलाके बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, झुंझुनूं में ओलावृष्टि और बरसात हुई। गंगानगर जिले के सूरतगढ़ के भोजेवाला चक चार बीजेडब्ल्यू में बिजली की कड़कड़ाहट सुनकर दो बालिकाओं कौशल्या व जमना की हृदयगति रुकने से मौत हो गई। ये दोनों बरसात के दौरान पेड़ के नीचे बैठी हुई थीं।

इन जिलों में पिछले तीन दिनों से रोजाना दोपहर बाद अचानक बादल, तेज हवा, बारिश व ओलावृष्टि का दौर शुरू हो रहा है। बुधवार को खाजूवाला, नोखा तहसील के सूरपुरा, रासीसर, झझू, छत्तरगढ़, आवा, लूणखां, पांच एडब्ल्यूएम, किल्चू, कल्याणसर व नापासर में बारिश व ओलावृष्टि हुई। छत्तरगढ़ में पहले बादल छाए, फिर तेज हवा के साथ बारिश और अंत में चने से भी बड़े ओले पड़ने शुरू हो गए। नोखा, रासीसर व सूरपुरा में ओलावृष्टि हुई। खाजूवाला में भी रह-रहकर बारिश हुई।

जोधपुर संभाग में बुधवार को बाड़मेर व जैसलमेर में दिनभर बादल छाए रहने के बाद शाम को बारिश तथा ओले गिरे। बाड़मेर शहर व निंबासर में शाम को हल्की बारिश के दौरान ओले भी गिरे। जोधपुर में शाम सात बजे व जैसलमेर में शाम 5 बजे अंधड़ आने के बाद नहरी क्षेत्र में बूंदाबांदी के साथ ओले गिरे, जिससे तापमान में कमी आ गई।

श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिलों में कई हिस्सों में अंधड़, बारिश व ओलावृष्टि से रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ। पदमपुर, रावला और सूरतगढ़ क्षेत्र में बारिश के साथ ओले गिरे। झुंझुनूं में शाम करीब साढ़े छह बजे बारिश शुरू हुई। बारिश के साथ चने के आकार के ओले भी गिरे। जयपुर में दिन में धूप निकली। शाम को ठंडी हवाएं चलने लगीं और बादल छा गए।





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