इंदौर. नगर निगम आयुक्त नीरज मंडलोई ने श्रीकृष्ण टॉकीज के स्थान पर बन रही बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत की बिल्डिंग परमिशन निरस्त करने के आठ महीने पुराने आदेश को यथावत रखा है। यह मामला उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद पुन: सुनवाई के लिए निगमायुक्त के सामने प्रस्तुत हुआ था। यह फैसला निर्माणाधीन स्थल के संरक्षित इमारत बोलिया छत्री से 100 मीटर भीतर होने से किया गया है। प्रदेश सरकार ने 1985 में फैसला लिया था कि राज्य संरक्षित इमारत के 100 मी. की परिधि में किसी प्रकार का निर्माण या उत्खनन नहीं हो सकेगा।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) के एक आदेश के बाद नगर निगम के भवन अधिकारी ने 23 जुलाई 2007 को 108, एमजी रोड पर बन रही इमारत की बिल्डिंग परमिशन भवन अनुज्ञा नियम 1984 के नियम 25 के तहत निरस्त कर दी थी। भवन अधिकारी का कहना था निर्माणकर्ता ने अनुमति लेते वक्त कई बातें छुपाईं। जमीन मालिक सरदार वीरेंद्रसिंह बोलिया की ओर से अधिकृत प्रदीप जोशी और निखिल कोठारी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका प्रस्तुत की थी।
इस याचिका का निराकरण करते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि यदि टीएंडसीपी के आदेश में कोई वास्तविक या तथ्यात्मक गलती है तो याचिकाकर्ता आदेश पारित करने वाले सक्षम प्राधिकारी से फस्र्ट एप्रोच करे। याचिकाकर्ता को यह भी छूट दी गई थी कि वह संबंधित विभागों में भी व्यापक अभ्यावेदन पेश करे और संबंधित अधिकारी से कहा गया था वे इसका निराकरण दो महीने में करें। इसी अभ्यावेदन के आधार पर निगमायुक्त श्री मंडलोई ने मामले की सुनवाई की। 31 मार्च को अंतिम आदेश पारित करते हुए उन्होंने बिल्डिंग परमिशन निरस्त करने के भवन अधिकारी के आदेश को बरकरार रखा।
इसमें कहा गया है निर्माण की अनुमति देते समय कहा था कि तथ्य छिपाए जाने अथवा किसी विभाग की आपत्ति आने पर अनुमति स्वत: निरस्त मानी जाएगी। टीएंडसीपी की आपत्ति यह थी कि एक तो निर्माण स्थल ऐतिहासिक महत्व के स्थान से लगकर है व दूसरा जमीन का उपयोग व्यवसाय के लिए नहीं है व इसका पहुंच मार्ग 12 मी. से कम चौड़ा है। आदेश में आयुक्त ने यह भी कहा है यदि निर्माणकर्ता पुरातत्व विभाग, टीएंडसीपी और आवास व पर्यावरण विभाग से नए सिरे से अनापत्ति पत्र लेकर आते हैं तो आवेदन पर फिर विचार किया जाएगा।