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..74 साल बाद गिर गया पर्दा

इंदौर.i नगर निगम ने बुधवार को बहुचर्चित रीगल टॉकिज मामले में आवंटित जमीन की लीज निरस्त कर दी। टॉकिज को सील कर निगम अधिकारियों ने जमीन कब्जे में ले ली है। निगमायुक्त नीरज मंडलोई ने बुधवार सुबह इस आशय का आदेश जारी कर सिटी इंजीनियर हंसकुमार जैन को जमीन का कब्जा तत्काल लेने को कहा। श्री जैन, रिमूवल अधिकारी अजित श्रीवास्तव और सहायक रिमूवल अधिकारी आर.एस. सोलंकी के नेतृत्व में निगमकर्मी दोपहर ढाई बजे टॉकिज पहुंचे और उसे सील कर दिया।

शो को बीच में रोक कर हुई सीलिंग- निगम अधिकारी जिस समय टॉकिज पहुंचे, फिल्म ‘वन टू थ्री’ का दोपहर 12 से तीन का शो चल रहा था। निगम अधिकारियों ने टॉकिज के जनरल मैनेजर मुकेश शाह को आदेश की प्रति देकर शो को बीच में ही रुकवा दिया। श्री शाह ने भास्कर को बताया कि शो रोकने के कारण सभी दर्शकों के पैसे वापस लौटाना पड़े। इसके बाद अगले शो के लिए टिकट लेने आए लोगों को इसकी जानकारी दे दी गई।

इन्हें उम्मीद- यह इंटरवल है

यह पर्दा न गिरा है और न गिरेगा..74 साल पुरानी रीगल टॉकिज सील होने के बाद डबडबाती आंखों से परिसर से बाहर निकले कर्मचारियों की जुबां इन्हीं शब्दों को दोहरा रही थी। उनकी आंखों के सामने यादों की रील चल रही थी और ‘फ्लैशबैक’ में एक-एक सीन उभरता जा रहा था। शहर के बीचों बीच बना रीगल टॉकिज 1934 में शुरू हुआ था। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चौराहा ही इसके नाम से जाना जाने लगा। 660 दर्शकों की क्षमता वाली इस टॉकिज में अभी तक लगभग 300 हिट फिल्में लग चुकी हैं।

21 साल से मैनेजर रहे मुकेश शाह बताते हैं आजादी के पहले बनी फिल्मों का रिकॉर्ड तो याद नहीं लेकिन मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म ‘प्यार झुकता नहीं’ छह महीने तक चली थी। यह अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इसके अलावा ‘आया सावन झूम के’ ‘बिदाई’ जैसी कई फिल्म चार-चार महीने तक चलीं। 1980 के दशक में दोबारा लगी फिल्म राजेश खन्ना अभिनीत ‘दाग’ लगी थी जो लंबे समय तक चली और रिकॉर्ड बना। 40 साल से यहां काम कर रहे सुपरवायजर खोंसला प्रसाद तिवारी बताते हैं उस समय तो यह आलम था कि चार फिल्म में साल निकल जाता था। अब 12 फिल्में लगती हैं।

बावजूद इसके इस टॉकीज से सालना 50 लाख रुपए मनोरंजन कर सरकार के खाते में जाता था। गेट कीपर धीरेंद्र कुशवाह कहते हैं इससे 40 परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी थी। इसके बंद होने से हम सब बेरोजगार हो गए। 30 साल से ज्यादा समय से यहां पदस्थ बुकिंग क्लर्क विनोद भाटिया कहते हैं यह क्लाइमेक्स है लेकिन फिल्म का दी एंड नहीं है। हम यहां रोज की तरह ही आएंगे..इस उम्मीद से कि कभी न कभी तो टॉकीज का ताला फिर खुलेगा, पर्दे पर फिर फिल्म चलेगी।

थ्री पीस सूट पहनकर आने वालों को ही मिलती थी बालकनी

फिल्म वितरक आदित्य चौकसे के मुताबिक अंग्रेजों ने इस टॉकिज के लिए एक अनोखा नियम बना रखा था। यहां बालकनी का टिकट उसी दर्शक को मिलता था जो थ्री पीस इंग्लिश सूट पहनकर आता था।

आखिरी शो में 330 दर्शक

बुधवार को टॉकिज को जब सील किया गया तब फिल्म वन-टू-थ्री चल रही थी। शो में 330 दर्शक थे। 12 से 3 का ही शो हुआ था और लगभग 1200 रुपए कलेक्शन हुआ।

यह है मामला

1 नवंबर 2000 को नगर निगम ने राज्य शासन और मेयर-इन-काउंसिल की अनुमति लिए बगैर रीगल टॉकिज की लीज को 20 साल के लिए 12 सितंबर 1998 से 11 सितंबर 2018 तक बढ़ा दिया।

यह जमीन 23947 वर्गफीट है। इसके लिए निगम ने सिर्फ 30000 रुपए सालाना का शुल्क लिया।

टॉकिज मालिकों ने लीज शर्तो का उल्लंघन करते हुए छह व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को किराए पर दे दिया जबकि लीज की जमीन केवल सिनेमा चलाने के लिए दी गई थी।

मामला अप्रैल 2007 को उजागर हुआ और प्रथम दृष्टया एक सिटी इंजीनियर और तीन अन्य इंजीनियर दोषी पाए गए। नगर निगम ने मई 2007 सभी को निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ जांच बैठा दी।

बाद में सभी इंजीनियर बहाल कर दिए गए।





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