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सब्जी हुई सपना

इंदौर.

ओल्ड पलासिया सब्जी मंडी

दृश्य-सुबह 9 बजे

महिला ग्राहक- गिलकी का क्या भाव है

दुकानदार- 60 रु. किलो

महिला सिर्फ इतना कहकर चली गई, इतनी महंगी सब्जी। लगता है सब्जी खाना छोड़कर दाल-रोटी से ही काम चलाना होगा।

नंदलालपुरा सब्जी मंडी

दृश्य- सुबह 9.45

ग्राहक ने दुकानदार से भिंडी और टेंसी के भाव पूछे तो जवाब मिला ये सब्जियां नहीं हैं। सब्जियों में फूल गोभी, पालक, मेथी, बैंगन और लौकी ही है। इस पर ग्राहक का कहना था कि रोजाना यही सब्जी खाकर ऊब चुके हैं।

इतवारिया बाजार सब्जी मंडी

दृश्य- सुबह 11 बजे

पूरे बाजार में लगभग एक जैसी सब्जियां दिखाई दे रही थीं। भिंडी और गिलकी भाव की वजह से खास बन गई हैं। बाजार में इनके दिखने पर हर कोई भाव पूछने जरूर आ रहा था लेकिन दुकानदार के भाव बताते ही लोग बिना कुछ कहे आगे चल देते।

ये दृश्य हैं शहर की तीन प्रमुख सब्जी मंडियों के जहां सब्जियों के आसमान छूते भावों की वजह से ग्राहक आहें भर रहा है। हर दिन अलग सब्जी की मांग हर घर में होती है लेकिन अब गृहिणियां भी सिर्फ गोभी, आलू या पालक बनाने को मजबूर हैं। बाजार में भिंडी, गिलकी, टेंसी के साथ ही दो दिन से टमाटर के भाव भी ऊंचे हो गए हैं। किचन का दृश्य भी इन दिनों बदल चुका है। आलू-प्याज के अलावा किचन में दूसरी सब्जी दिखाई नहीं दे रही है।

कितना मोल भाव करें

पलासिया निवासी संगीता दुबे कहती हैं कि पहले सब्जियां महंगी लगती है तो एक-दो रुपए भाव कम करा लेते लेकिन 50 या 60 रुपए किलो यदि सब्जी मिलेगी तो दुकानदार भी कितना भाव कम करेगा।

भिंडी, गिलकी खाए महीनों हो गए

सीताराम पार्क कॉलोनी निवासी मीना सोनपालिया कहती हैं घर में 25 से अधिक सदस्य हैं। ऐसे में भिंडी या गिलकी जैसी महंगी भावों की सब्जी बनना मुश्किल है। अब इंतजार है सब्जियों के सस्ते होने का।

किचन का बजट गड़बड़ाया

रामबाग निवासी रीना वधावन कहती हैं कि सारी चीजों में बचत कर चल सकते हैं लेकिन सब्जियों में कटौती करने में मुश्किल होती है। सब्जियों के भाव तेज होने से किचन का बजट गड़बड़ा गया है।

रोजाना दाल-कढ़ी भी तो नहीं बना सकते

कंचनबाग की अनिता शर्मा कहती हैं सब्जी इतनी महंगी है कि लगता है रोजाना दाल-कढ़ी ही बनाई जाए लेकिन सब्जी के बिना कोई खाना नहीं खाएगा इसलिए महंगे दाम पर भी सब्जी खरीदनी पड़ रही है।

दुकानदार बोले

हम खुद महंगी सब्जी नहीं रखते

इतवारिया सब्जी मंडी व्यापारी राजू पवार कहते हैं बाहर से वैसे ही सब्जियां कम आ रही हैं। महंगी सब्जी रखते भी हैं तो कोई खरीदता नहीं। इसलिए हमने महंगी सब्जियां रखना ही बंद कर दिया है।

अंकुरित अनाज सब्जियों के विकल्प

सब्जी विक्रेता मोहन ठाकुर कहते हैं कि सब्जियां इतनी महंगी है कि लोग अंकुरित अनाज भी खरीद कर उसका उपयोग सब्जी बनाने में कर रहे हैं। इसलिए आजकल अंकुरित मूंग, चना व बटला आदि की थैलियां ज्यादा बिकने लगी हैं।

होटलों के बिल में भी दिखा असर

सब्जियों के महंगे होने से होटलों में भी सब्जियों के दामों में 5 से 10 रुपए का इजाफा किया गया है। हालांकि मेन्यू में ये परिवर्तन अभी नहीं हुआ है लेकिन होटलों में बिलों में बढ़े हुए दाम ही चुकाना पड़ रहे हैं।

बुधवार को भी मंडी में आई कम गाड़ियां, दाम मामूली कम

अच्छी कीमतें मिलने के बाद भी सब्जियों की आवक नहीं बढ़ पा रही है। व्यापारियों के अनुसार बुधवार को भी चोइथराम मंडी में 18-22 गाड़ि़यों की आवक हुई। हालांकि कुछ सब्जियों के दाम मंगलवार की तुलना में मामूली कम हुए हैं लेकिन खेरची बाजारों में दाम वही ऊंचे बोले जा रहे हैं। थोक में मंगलवार को भिंडी 25-30, गिलकी 40-45 रुपए बिकी थी जो बुधवार को घटकर क्रमश: 22-25 और 35-40 रुपए रह गई।





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