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जग्गी मामले की सुनवाई से कोर्ट का इंकार

बिलासपुर. राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में आरोपियों की याचिका पर सुनवाई कर पाने में जस्टिस एलसी भादू व टीपी शर्मा की डिविजन बेंच ने असमर्थता जाहिर कर दी। कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई अन्य सक्षम बेंच से या चीफ जस्टिस के निर्देशानुसार स्पेशल डिविजन बेंच में कराई जा सकती है।

जग्गी हत्याकांड में लगभग 30 आरोपियों की जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित हैं। इन सभी मामलों की एक साथ सुनवाई की जा रही है। बुधवार को सुबह सवा दस बजे आरोपियों के वकीलों ने डिविजन बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए मेंशन किया। जस्टिस भादू ने इस पर इन मामलों को सुन पाने में असमर्थता जताई। उन्होंने मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस के निर्देशानुसार गठित किसी भी बेंच में करना उचित बताया। गौरतलब है कि मामले में मुख्य आरोपी अमित जोगी को स्पेशल कोर्ट द्वारा दोषमुक्त करने के बाद बाकी आरोपियों ने भी हाईकोर्ट में इसी आधार पर दोषमुक्त करने के लिए याचिका दायर की है।

इनमें याहया ढेबर, अभय गोयल, फिरोज सिद्दीकी आदि शामिल हैं। मामले में अंतिम सुनवाई न हो पाने पर आरोपियों के वकील ने सस्पेंशन आफ सेनटेंस पर सुनवाई का अनुरोध किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।

मामले सुनवाई के लिए 24 मार्च को लिस्ट हुए थे। उस दिन जस्टिस भादू के अवकाश की वजह से प्रकरण चीफ जस्टिस राजीव गुप्ता, जस्टिस सुनील सिन्हा की डिविजन बेंच में प्रस्तुत किए गए। कोर्ट ने सुनवाई के लिए एक अप्रैल की तारीख तय की। एक अप्रैल को मामले जस्टिस सुनील सिन्हा व जस्टिस टीपी शर्मा की डीबी में प्रस्तुत हुए। उक्त डीबी में सिविल मामलों की सुनवाई होनी थी, अत: जग्गी मामले की सुनवाई आज दो अप्रैल को तय की गई थी। सुनवाई के लिए मुंबई, जबलपुर से आए वकील यहां रुके हुए थे। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से जबलपुर के सीनियर एडवोकेट सुरेंद्र सिंह, सतीशचंद्र दत्त, सीबीआई की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता गौतम भादुड़ी और शासन की ओर से वकील अखिल मिश्रा, आशीष शुक्ला, डीके ग्वालड़े उपस्थित थे।





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