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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर.
क्राइम स्क्वाड ने बुधवार को दोपहर अचानक सेंट्रल जेल में धावा बोला और एक-एक बैरक की पड़ताल कर मोबाइल, गांजा और शराब की खाली बोतलों के साथ इलेक्ट्रिक हीटर जब्त किए। इस छापे ने जेल में चल रहे गोरखधंधे की पोल खोल दी।
क्राइम स्क्वाड के लोग दोपहर 12 बजे जेल पहुंचे। एडिशनल एसपी क्राइम अजातशत्रु बहादुर सिंह ने जांच के लिए पुलिस के तीन दस्ते तैयार किए थे। एक दस्ते की कमान क्राइम स्क्वाड प्रभारी सत्येंद्र पांडे को सौंपी गई। देवेंद्रनगर टीआई मोनिका पांडे और एएसआई राजेश तिवारी को एक-एक टीम का नेतृत्व सौंपा गया। तीनों दस्ते में एक-एक दर्जन अफसर और जवान थे। जांच के दौरान एक दस्ते को बड़े चक्कर की बैरक नंबर-8 से मोबाइल हैंडसेट मिला।
छापे की खबर मिलने के बाद संभवत: कैदियों को मोबाइल छिपाने का मौका नहीं मिला और उन्होंने आनन-फानन में उसे बाथरुम की दीवार पर रख दिया था। मोबाइल सेट एक फटे कपड़े में लपेटकर रखा गया था। कई बैरकों के सामने सिमकार्ड कूड़ेदान में पड़े थे। झिल्ली में लपेटने के बाद उन्हें कचरे के डिब्बों में डाला गया था। गांजे के कई खाली पैकेट भी जब्त किए गए। ऐसी एक भी बैरक नहीं थी, जिसके बाहर गांजे के खाली पैकेट नहीं पड़े थे। राजनांदगांव का बंदी बलराम साहू गांजे के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया। उसके खिलाफ नारकोटिक एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
आधा दर्जन से ज्यादा शराब की खाली बोतलें भी जब्त की र्गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जेल की नालियों में टूटी हुई बोतलों का जखीरा था। ‘दैनिक भास्कर’ ने कई बार जेल में मोबाइल होने की खबरें छापी हैं। मंगलवार को भी नामी बंदी से मोबाइल जब्त किया गया था, लेकिन मामला दबा दिया गया।
क्यों पड़ा छापा
कैदखाने में अय्याशी का सामान बेरोक-टोक पहुंचने की शिकायतें काफी दिनों से थीं। क्राइम स्क्वाड के दस्ते को भी भनक लग गई। पुलिस ने खुफिया तंत्र को सक्रिय किया। उसके बाद ऊंची दीवारों के पीछे की खबरें बाहर आने लगी। पुलिस अफसरों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को सारी हकीकत बताई। प्रशासनिक अफसरों को विश्वास में लेने के बाद बुधवार को योजनाबद्घ तरीके से दबिश दी गई। जेल अधीक्षक एसके मिश्रा कहीं दौरे पर थे। जिस समय छापामार दस्ता जेल पहुंचा उस समय जेलर एसपी केसर और डिप्टी जेलर ही ड्यूटी पर थे। आला अफसरों को देखकर किसी को कुछ नहीं सूझा।
ढाबों का सच
पुलिस ने कई बैरकों में हीटर जब्त किए। पूछताछ के दौरान कैदियों ने यह उगल दिया कि बिजली के हीटरों को सिगड़ी के रुप में इस्तेमाल किया जाता था। स्पेशल और मनपसंद भोजन तैयार करके उन्हें बेचा जाता था। 50 रुपए से लेकर 100 रुपए प्लेट भोजन की कीमत तय थी। हीटर जब्त होने से इस बात की पुष्टि हो गई कि अफसरों के लगातार दावों के बावजूद जेल में ढाबा चल रहा है।
बीयर-चिकन सब अंदर
कैदखाने में स्पेशल दस्ते के छापे से इस बात का खुलासा हो गया है कि जेल में चिकन और शराब के साथ-साथ गांजा और चरस भी आसानी से पहुंच जाता है। सूत्रों का दावा है कि नंबरदारों और प्रहरियों से थोड़ी जान पहचान होने के बाद कोई भी सामान अंदर पहुंचना मुश्किल नहीं है। नंबरदार और प्रहरी जेल के प्रवेश द्वार पर मिलीभगत कर सामान लाने का प्लान तैयार करते हैं। आमतौर पर कोई भी प्रतिबंधित सामान अपरान्ह 3 और शाम 5 बजे के बाद पहुंचाया जाता है। अफसरों से लिंक होने के कारण वे जानते-बूझते आंखें मूंदे रहते हैं। कुछ रसूखदार बंदियों व कैदियों का रुतबा इतना है कि गेट पर उनका नाम लेते ही कोई सामान छूने तक की हिम्मत नहीं करता।