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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. चीनी पुलिस व सेना द्वारा तिब्बत की राजधानी ल्हासा में करीब डेढ़ सौ तिब्बतियों को मारे जाने से भारत के तिब्बती शरणार्थी उद्वेलित हैं। मैनपाट सरगुजा से यहां पहुंचे करीब 200 शरणार्थियों ने बुधवार को गांधी चौक से रैली निकाली और कलेक्टारेट पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टोरेट के सामने वे करीब 15 मिनट तक नारेबाजी करते रहे।
चीन सरकार द्वारा तिब्बत पर अत्याचार के खिलाफ शरणार्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है। मैनपाट के शरणार्थियों द्वारा छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में रैलियां निकालकर प्रदर्शन किया जा रहा है। इसी के तहत आज शरणार्थी बिलासपुर पहुंचे। गांधी चौक में विरोध प्रदर्शन करने के बाद बैनर-पोस्टर लेकर नारेबाजी करते हुए वे प्रमुख मार्गो से होकर कलेक्टोरेट पहुंचे। कलेक्टोरेट के गेट के सामने वे करीब 15 मिनट तक नारेबाजी करते रहे। उनकी आवाज सुनकर कलेक्टोरेट समेत अन्य दफ्तरों के कर्मचारी भी वहां आ पहुंचे थे।
प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में शरणार्थियों ने कहा है कि चीन सरकार द्वारा तिब्बत में किए जा रहे नरसंहार को रोकने के लिए केंद्र सरकार को आगे आना चाहिए। 10 मार्च से ल्हासा में चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन में अब तक चीनी सेना ने 135 से अधिक तिब्बतियों को मौत के घाट उतार दिया है। तिब्बत के आम्दो प्रांत में भी 20 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
500 से अधिक आंदोलनकारी घायल हैं, लेकिन गिरफ्तारी के डर से सरकारी अस्पतालों की सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि तिब्बत में मौलिक अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे निर्दोष लोगों की हत्या करने व बर्बरतापूर्वक दमन को रोकने के लिए चीन सरकार पर दबाव बनाए। जब तक वहां अनिश्चतता की स्थिति का समाधान नहीं हो जाता, तब तक तिब्बती शरणार्थी पूरे विश्व में अहिंसात्मक आंदोलन करते रहेंगे। शरणार्थियों का आंदोलन छत्तीसगढ़ के दूसरे शहरों में भी जारी रहेगा।