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गुंडागर्दी की कीमत चुका रहा है लालखदान

बिलासपुर. शहर में जमीन की कीमतें बढ़ने के बाद भी खरीदारों की कमी नहीं है। स्थिति यह है कि शहर के भीतर खोजने से भी जमीन नहीं मिलने के कारण लोग नगर निगम सीमा के बाहर घर बनाने लगे हैं। इसके विपरीत लालखदान शहर का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां लोग एकदम सस्ते में भी जमीन खरीदने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं।

लोगों को अपना घर तो चाहिए, लेकिन जिस क्षेत्र में वे घर बनाने का सपना देख रहे हैं वहां शांति का माहौल उनकी प्राथमिकता में है। यही कारण है कि शहर ने लगभग हर क्षेत्र में चौतरफा विकास किया, लेकिन लालखदान क्षेत्र अब तक अपनी पुरानी व जर्जर स्थिति में ही है। हाईकोर्ट, बस स्टैण्ड, ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना के चलते बोदरी में अधिकाधिक लोगों ने जमीन खरीद ली है, वहीं निर्माण कार्य भी तेज गति से किया जा रहा है।

अपोलो अस्पताल, एसईसीएल मुख्यालय व एनटीपीसी के कारण बिलासपुर और सीपत की दूरी लगभग समाप्त हो गई है। यूनिवर्सिटी की स्थापना के बाद लोग धीरे-धीरे कोनी तक बढ़ गए हैं। कुछ कालोनियां तो उससे भी आगे गतौरी में निर्माणाधीन हैं। इसके ठीक विपरीत लालखदान ने लंबे समय बाद भी अब तक कोई प्रगति नहीं की।

लालखदान क्षेत्र में कालोनियों का निर्माण व फैक्ट्री की स्थापना तो दूर की बात है लोग अपना घर बनाने के लिए भी वहां जमीन लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। लालखदान में भी क्षेत्रवार जमीन की कीमत अलग-अलग है, लेकिन 60 से 100 रुपए वर्गफुट जैसी नाममात्र कीमत में भी लोगों को जमीन का खरीदार ढूंढने में वर्षों का समय लग रहा है। लालखदान क्षेत्र में न केवल निजी, बल्कि सैकड़ों एकड़ शासकीय भूमि भी खाली पड़ी है, लेकिन अशांत वातावरण एवं आए दिन होने वाले मारकाट के डर से लोग शहर से बाहर किसी दूसरे हिस्से में अधिक कीमत में प्लाट खरीदना पसंद कर रहे हैं।

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक प्रापर्टी डीलर ने बताया कि उस क्षेत्र में कुछ संगठनों व एक परिवार विशेष का राज चलता है। जीवन भर की कमाई से छोटा सा प्लाट खरीदने के बाद लोन पर घर बनाने का सपना संजोए किसी व्यक्ति ने उस क्षेत्र में जमीन खरीद भी ली, लेकिन कब्जा किसी और का हो गया हो तो यह उसके जीवन का सबसे दुखद क्षण होगा। लालखदान में यही स्थिति लंबे समय से यथावत है। शायद यही कारण है कि उस क्षेत्र में कुछ निर्माण कराने का साहस कोई नहीं जुटा पाता।

इन्होंने बढ़ाई जमीन की कीमत: करीब एक दशक पहले तक शहर में जमीन की कीमतें इतनी नहीं थी, लेकिन कुछ वर्षो में ही इसमें अचानक बढ़ोतरी हो रही है। इसका प्रमुख कारण शहर को लगातार बड़ी-बड़ी सौगातें मिलना है। शहर में एसईसीएल मुख्यालय और यूनिवर्सिटी तो पहले से ही थीं, लेकिन हाईकोर्ट, रेलवे जोन कार्यालय, अपोलो अस्पताल आदि की स्थापना के बाद से जमीन की मांग बढ़ती गई। मांग बढ़ने से इसकी कीमतों में भी बढ़ोतरी होती गई।





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