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छठघाट हत्याकांड सुलझा

बिलासपुर.b बहुचर्चित छठघाट हत्याकांड के दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। तीसरा आरोपी जेल में बंद है, जबकि चौथे आरोपी की तलाश की जा रही है। बदनीयती के चलते प्रेमी युगल की हत्या हुई थी।

तोरवा स्थित छठघाट में 22 अप्रैल, 2007 को मिलने गए प्रेमी युगल सीपत चौक निवासी आकांक्षा दुबे व रवि वाधवानी की हत्या हुई थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने शहर के अलावा आसपास के इलाकों में भी सरगर्मी से आरोपियों की तलाश की थी, लेकिन सालभर तक उन्हें इंतजार करना पड़ा। बुधवार को एसपी प्रदीप गुप्ता ने पत्रकारों के सामने दोहरे हत्याकांड का खुलासा किया।

उन्होंने बताया कि दो दिन पहले क्राइम ब्रांच को मुखबिर से सूचना मिली थी कि मस्तूरी किरारी निवासी दुकालू उर्फ राजूदास मानिकपुरी रेलवे क्षेत्र में रहकर रिक्शा चलाता था, वह सालभर से पेंड्रा के एक होटल में काम कर रहा था। वह छठघाट मामले में जुड़ा हुआ है। पुलिस ने पेंड्रा में दबिश देकर उसे हिरासत में ले लिया। क्राइम ब्रांच में पूछताछ करने पर उसने बताया कि 22 अप्रैल को वह रिक्शा में साथी जगमल चौक निवासी बबलू उर्फ मिथुन विश्वकर्मा, बापूखोली निवासी मोंटी खान व मंडला निवासी सोनू उर्फ रामू गोंड़ के साथ छठघाट गया था।

यहां वे सभी गांजा पी रहे थे। इस बीच उन्होंने पचरी के पास एक प्रेमी युगल को मिलते देखा। उन्हें देखकर उनकी नीयत खराब हो गई और छेड़छाड़ की नीयत से वे नीचे पहुंचे। छेड़छाड़ करने पर रवि ने उनका विरोध किया तो मोंटी खान व राजूदास ने अपने पास रखे धारदार चाकू से उस पर हमला कर दिया। इसके बाद उन्होंने लड़की से अनाचार का प्रयास किया था। रवि की चीख सुनकर आरोपी भागने लगे थे। पुलिस में शिकायत करने की धमकी देने पर उन्होंने स्वीटी को भी मार डाला और दोनों के मोबाइल पुल के नीचे पानी में फेंक दिया। राजूदास के बयान पर मिथुन को जगमल चौक स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया गया, रामू फरार था। राजूदास की निशानदेही पर लालखदान निवासी मित्र राजू गुप्ता के मामा-भांजा तालाब के पास खाली मकान से चाकू जब्त कर लिया गया है।

मोंटी खान को सप्ताह भर पहले धारा 110 के तहत पकड़कर कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था। पुलिस ने दुकालू उर्फ राजूदास (25 वर्ष) व बबलू उर्फ मिथुन विश्वकर्मा (30) को रिमांड पर जेल भेज दिया है। दोहरे हत्याकांड का पर्दाफाश करने में एसपी प्रदीप गुप्ता, एएसपी सिटी बीएन मीणा, टीआई डीके नेताम, क्राइम ब्रांच के आरक्षक शोभित, हेमंत, जितेश, बलबीर, जय, मनीष, अशोक की महत्वपूर्ण भूमिका रही।





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